जियो टैग मैप से उजागर हुई नदी के अस्तित्व से बुरी तरह से छेड़छाड़
झांसी। पहुंज नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए एनजीटी में याचिका दायर करने वाले हाईकोर्ट के अधिवक्ता नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव व समाजसेवी डेनियल साइमन ने स्पष्ट किया कि पहुंज नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए वह हर स्तर पर प्रयास करते रहेंगे।
उन्होंने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दायर याचिका में जिला प्रशासन सहित सभी सबंधित सरकारी 14 विभागों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। मीडिया से बातचीत करते हुए याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव व डेनियल साइमन ने कहा कि लगातार पहुंज नदी के अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है। बड़े-बड़े बिल्डर लगातार इस नदी के आसपास के इलाके को अतिक्रमण के चलते जमीदोज करते जा रहे हैं। उन्होंने इस मामले में निर्माणाधीन संफ्रान सरोवर हाइट्स प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि एनजीटी के मानकों के विपरीत इस प्रोजेक्ट का निर्माण किया जा रहा है। स्थिति यह है कि पहुंज नदी के जल की धारा को भी मोड़ने की कोशिश की जा रही है। जियो टैग मैप के अनुसार इस नदी के अस्तित्व से बुरी तरह से छेड़छाड़ कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि झांसी को पीने के पानी की आपूर्ति में सबसे महत्वपूर्ण योगदान पहुंज नदी का भी है। इस नदी के उद्गम स्थल से लेकर इसके समापन स्थल तक के अस्तित्व को बचाने के लिए एनजीटी की शरण ली है। याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव व डेनियल साइमन का कहना है कि सबसे ज्यादा इस नदी को क्षति नंदनपुरा सीपरी बाजार क्षेत्र में पहुंची है। लगभग एक दर्जन से अधिक कॉलोनी व परिसर ऐसी विकसित हो गई है, जो नदी तथा उसके डूब क्षेत्र को अतिक्रमित कर नियमों को ताक पर रख कर बनाई गई हैं।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा तमाम शो रूम्स, स्कूल्स आदि ने भी नदी के अस्तित्व को क्षति पहुंचाई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उन सरकारी विभागों को भी नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने सब कुछ जानने समझने के बाद भी अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि इन सरकारी विभागों के जवाबों का इंतजार है। यदि उनके जवाब गोल-गोल हुए, तो हम भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दाखिल करेंगे, ताकि वास्तविक स्थिति ट्रिब्यूनल के सामने आ सके। उन्होंने कहा कि पहूज नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।














