साजिशकर्ता गैंग का व्यक्ति ही लिख रहा था बाहर की दवाएं, जाँच रिपोर्ट में हुई पुष्टि
झांसी। जांच में हुए खुलासा में साबित हो गया कि जिला अस्पताल में साजिशकर्ताओं ने सक्रिय बाहरी दवा गैंग के माध्यम से नेत्र परीक्षक आदित्य साहू को साज़िश का शिकार बनाया गया है। जाँच में सामने आया कि बाहर की दवाएं कोई बाहरी व्यक्ति/महिला द्वारा लिखी जा रही थीं। नेत्र परीक्षक आदित्य साहू की हैण्डराइटिंग भी पर्चे पर लिखी दवा से मैच नहीं की, जिससे उन्हें क्लीनचिट मिल गई है, लेकिन अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर अस्पताल के अन्दर बाहरी व्यक्ति दवाएं कैसे लिख रहा था? कहीं यह कोई बड़ी साज़िश तो नहीं है।
गौरतलब है कि जिलाधिकारी गौरांग राठी द्वारा 4 मई की दोपहर लगभग 2 बजे जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। उसी दौरान नेत्र रोग विभाग में मरीजों ने बाहर की दवाएं लिखे जाने की शिकायत करते हुए पर्ची सौंपी थी। इस पर जिलाधिकारी के आदेश पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुधाकर पाण्डेय ने नेत्र परीक्षक आदित्य साहू को निलम्बित करने के निर्देश दिए। 5 मई को जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरके सक्सेना ने कार्य से हटाते हुए स्पष्टीकरण माँगा था। नेत्र परीक्षक ने बाहर की दवाएं लिखने के आरोपों को नकारते हुए दावा किया था कि पर्ची पर उसकी हेण्डराइटिंग में दवा नहीं लिखी है। इस पर सीएमएस ने 3 सदस्यीय चिकित्सकों की कमिटि गठित कर जाँच के निर्देश दिए। जाँच रिपोर्ट के अनुसार 3 शिकायत करने वाले 3 मरीजों से सम्पर्क किया गया, जिसमें 2 मरीजों के मोबाइल फोन नम्बर बन्द पाए गए। वहीं शिकायतकर्ता मऊरानीपुर निवासी मरीज ने बताया कि किसी महिला द्वारा बाहर की दवा लिखी गई है।
दरअसल जब्त की गई पर्ची की लिखावट की जाँच कराई गई, जो नेत्र परीक्षक आदित्य साहू की लिखावट से मैच नहीं की। जाँच में नेत्र परीक्षक द्वारा दवाएं लिखने के आरोप सिद्ध नहीं हुए। जांच कमिटि ने अपनी रिपोर्ट में बाहरी व्यक्ति द्वारा बाहर दवा लिखने की पुष्टि करते हुए जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंप दी। पर, वह बाहरी व्यक्ति चिह्नित नहीं हो सका, जो जिला अस्पताल के कक्ष में बैठकर दवाएं लिख रहा था।














