लखनऊ संवाद सूत्र। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 जून 26 में दिल्ली के मालवीय नगर में हुई भीषण अग्निकांड में मौतों की घटना का संज्ञान लेते हुए राज्य भर में सभी ऊंची इमारतों, होटलों व नर्सिंग होम्स आदि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की गहन सुरक्षा जांच (फायर सेफ्टी ऑडिट) के सख्त निर्देश दिए हैं। यह निर्देश पुलिस, फायर ब्रिगेड, विकास प्राधिकरणों को विशेष रूप से दिए गए हैं।
अब देखना यह है कि झांसी में इन दिशा-निर्देशों का कितना पालन होता है या फिर खानापूर्ति ही होती रहेगी। गौरतलब है कि इस तरह की सेफ्टी व बिना मानचित्र स्वीकृति के व्यवसायिक भवन, नर्सिंग होम्स के निर्माण, बेसमेंट का व्यवसायिक दुरुपयोग आदि संबंधित मुद्दों पर बुनिमो के केंद्रीय अध्यक्ष भानु सहाय लम्बे समय से लाक्षागृह बने भवनों के खिलाफ संघर्ष छेड़े हुए हैं, किंतु जिम्मेदार विभाग पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं।
मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश:
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- गहन निरीक्षण: विकास प्राधिकरणों, पुलिस, पीडब्ल्यूडी और अग्निशमन विभागों के अधिकारियों को संयुक्त रूप से सभी ऊंची इमारतों, दफ्तरों और होटलों की जांच करने को कहा गया है।
- फायर सेफ्टी ऑडिट: विशेष रूप से होटलों की फायर सेफ्टी ऑडिट की जाए और उसकी रिपोर्ट जल्द से जल्द जमा की जाए।
- कमी दूर करना: फायर सेफ्टी प्रणालियों को मजबूत करने और किसी भी प्रकार की खामी को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
- स्ट्रक्चरल ऑडिट: यूपी सरकार ने 33 शहरों में 10 वर्ष से अधिक पुरानी बहुमंजिला इमारतों का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य कर दिया है।
- लिफ्ट सुरक्षा: हाई-राइज बिल्डिंग में लगी लिफ्ट और एस्केलेटर के लिए भी कड़े नियम और कानून जल्द ही लागू किए जा रहे हैं।














