आरोपी गिरफ्तार, नोटिस पर रिहाई पर उठे सवाल, कर्मचारी संगठनों की चुप्पी रहस्यमय
झांसी/डबरा (संवाद सूत्र)। उमरे के झांसी मंडल के डबरा रेलवे स्टेशन पर रात्रि में ड्यूटी पर एक महिला सहायक लोको पायलट के साथ छेड़छाड़ की घटना ने रेलवे परिसरों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत के आधार पर जीआरपी ने आरोपी की पहचान कर उसके खिलाफ मामला दर्ज कर पकड़ लिया, लेकिन आरोपी को नोटिस पर छोड़ दिए जाने के बाद इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, आरोपी को नोटिस पर छोड़ा जाना कानूनी प्रक्रिया के तहत हुआ या नहीं, इसका अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अधीन रहेगा।
झांसी मंडल में पदस्थ एक महिला सहायक लोको पायलट 2 जुलाई 2026 की रात लगभग 10:30 बजे 11057 पठानकोट एक्सप्रेस से ड्यूटी पर डबरा रेलवे स्टेशन पहुंचीं। यहां से उन्हें मालगाड़ी (क्रमांक एमएसबी एलएन-23678) के साथ झांसी के लिए रवाना होना था।
बताया गया है कि महिला लोको पायलट डबरा स्टेशन पर झांसी दिशा की ओर स्थित नेम बोर्ड के पास खड़ी थीं। इसी दौरान पीछे से आए एक मनचले ने गलत नीयत से उन्हें स्पर्श किया। महिला के मुड़कर देखने पर आरोपी मौके से भाग गया। सहायक लोको पायलट ने घटना की सूचना तत्काल डिप्टी एसएस डबरा और झांसी कंट्रोल को दी गई। झांसी पहुंचने पर उसकी तहरीर पर जीआरपी में शिकायत दर्ज की गई, जिसके बाद मामला डबरा जीआरपी को भेजा गया।
जांच के दौरान जीआरपी द्वारा स्टेशन और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। स्थानीय लोगों की मदद से संदिग्ध युवक की पहचान राहुल पुत्र भगवान दास जोशी (25 वर्ष), निवासी सोसायटी रोड, डबरा के रूप में हुई। पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और उसके खिलाफ अपराध क्रमांक 667/26, धारा 74 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया। आरोपी राहुल जोशी रेलवे से सेवानिवृत्त कर्मचारी भगवान दास जोशी का पुत्र है।
इस मामले में दो दिन बाद आरोपी की गिरफ्तारी के पश्चात उसे अपराध दर्ज कर नोटिस पर छोड़ दिया जाना सवाल खड़े कर रहा है। इस कार्रवाई के बाद रेलवे में रात्रिकालीन ड्यूटी करने वाली महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थानों पर ऐसी घटनाएं होती हैं, तो महिला कर्मचारियों के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। जबकि ट्रेन कहीं भी जंगल में खड़ी हो जाती है इस तरह की घटनाएं होंगी तो महिलाएं कहां सुरक्षित है।
अब यह देखना होगा कि इस मामले में पुलिस की आगे की जांच क्या निष्कर्ष निकालती है और रेलवे प्रशासन महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाता है। इस मामले में कर्मचारी संगठनों की चुप्पी भी रहस्यमय है।














