साथी ने पुलिस को धमकाया- गृह मंत्रालय से आदेश, तुरंत छोड़ो
झांसी। साइबर सेल और थाना बरुआसागर पुलिस ने एक ऐसे शातिर साइबर ठग को गिरफ्तार किया है, जो खुद को बरुआसागर थाने का इंस्पेक्टर बता कर लोगों को फोन पर अश्लील वीडियो देखने के आरोप में मुकदमे और आजीवन कारावास का डर दिखा कर मामला रफा-दफा कराने के नाम पर उनसे ऑनलाइन रुपए ट्रांसफर करा लेता था।
पुलिस को आश्चर्य तो तब हुआ जब आरोपी के गिरफ्तार होने के बाद के साथी ने खुद को केंद्रीय गृह मंत्रालय और यूपी डीजीपी कार्यालय का आईपीएस अधिकारी बता कर पुलिस अधिकारियों को फोन कर आरोपी को छोड़ने का दबाव बनाया। पुलिस इन कॉल्स की भी जांच कर रही है और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।
दरअसल, बरुआसागर थाना पुलिस को भारतीय साइबर अपराध समन्वय पोर्टल से कर्नाटक के दो पीड़ितों की शिकायत मिली। दोनों ने बताया कि उनके पास बरुआसागर थाने के “इंस्पेक्टर राहुल पांडेय” के नाम से फोन आया था। फोन करने वाले ने कहा कि उनके खिलाफ पोर्न देखने की शिकायत दर्ज हुई है और इस अपराध में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। उसने पीड़ितों को डराते हुए कहा कि यदि शिकायत बंद करानी है तो तुरंत भेजे गए क्यूआर कोड पर 10 हजार रुपये ट्रांसफर कर दें, अन्यथा पांच मिनट के भीतर पुलिस उनके घर पहुंच जाएगी। घबराए पीड़ितों ने बताए गए खाते में पैसे भेज दिए।
जांच में सामने आया कि आरोपी बरुआसागर से लगभग 20 किमी दूर मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के टहरका गांव का निवासी दीपक खंगार पुत्र मोतीलाल है, उसे गिरफ्तार कर लिया। वह बरुआसागर थाने की पूरी जानकारी रखता था। उसने थाने में तैनात उप निरीक्षक राहुल कुमार के नाम का फायदा उठाने के लिए खुद को “इंस्पेक्टर राहुल पांडेय” बताना शुरू किया। राहुल नाम वह इसलिए बताता था ताकि यदि कोई व्यक्ति थाने से जानकारी भी करे तो उसे वहां राहुल नाम का पुलिस अधिकारी तैनात होने की पुष्टि मिल जाए और उसे शक न हो।
इतना ही नहीं कि आरोपी फोन करते समय बेहद शातिर तरीका अपनाता था। वह अपने यू ट्यूब से आसपास लैंडलाइन फोन की घंटी और पुलिस वायरलेस की आवाजें चलाता था, जिससे पीड़ितों को यह विश्वास हो जाता था कि वास्तव में किसी थाने से कॉल आ रही है।बैकग्राउंड में लगातार आने वाली इन आवाजों से लोग घबरा जाते थे और बिना ज्यादा सवाल किए पैसे ट्रांसफर कर देते थे।
पुलिस की शुरूआती जांच में पता चला कि आरोपी अपने नाम से सिम कार्ड भी इस्तेमाल नहीं कर रहा था। शिकायत में मिले मोबाइल नंबर की तकनीकी जांच के बाद उसकी लोकेशन मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के टहरका गांव में मिली। इसके बाद साइबर सेल और बरुआसागर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार कर लिया। वह पैसे मंगवाने के लिए भी दूसरे लोगों के अकाउंट इस्तेमाल कर रहा था।
साथी को छुड़ाने फर्जी IPS बन कर कर रहे कॉल
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके साथियों ने नया तरीका अपनाया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, लगातार ऐसे फोन आ रहे हैं जिनमें कॉल करने वाले खुद को दिल्ली के गृहमंत्रालय या यूपी डीजीपी कार्यालय का IPS अधिकारी बता रहे हैं। वे पुलिस अधिकारियों से कहते हैं कि गिरफ्तार युवक को तुरंत छोड़ दो, नहीं तो कार्रवाई कर वर्दी उतरवा दी जाएगी। पुलिस का मानना है कि ये कॉल भी उसी साइबर गैंग के सदस्य कर रहे हैं, ताकि दबाव बनाकर अपने साथी को छुड़ाया जा सके।
फिलहाल पुलिस आरोपी के मोबाइल, बैंक खातों, कॉल डिटेल और डिजिटल लेनदेन की गहन जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह में कितने लोग शामिल हैं, कितने राज्यों में इनके शिकार मौजूद हैं और पुलिस तथा सरकारी अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर अब तक कितने लोगों से ठगी की गई है।














