झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय कक्ष संख्या दो देवाशीष की अदालत में दस वर्ष पूर्व हरि शंकर हत्याकांड में समस्त गवाहों के मुकर जाने के बाद भी अभियोजन की ओर से फोरेंसिक जांच और वादी का बयान महत्वपूर्ण रूप से न्यायालय में रखने पर हत्या का दोष सिद्ध होने पर तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा व अर्थदंड से दण्डित किया गया।
अभियोजन की और पैरवी कर रहे एडीजीसी संजय देव शर्मा ने बताया कि कोतवाली छनियापुरा निवासी विनीता ने थाना नवाबाद में आठ अक्टूबर 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि वह अपने पति हरि शंकर के साथ कोछाभांवर में रहने वाले अपने रिश्तेदार महेश के यहां निमंत्रण में खाना खाने गई थी तभी वहां मौजूद बांदा के बिजली खेड़ा निवासी हरि बाबू, नवाबाद के कोछाभांवर निवासी रोहित, अंतर सिंह, प्रभु दयाल, उसके पति को आयोजन से बाहर ले गए और टेंट के पीछे ले गए जहां ले जाकर हरि शंकर को तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी।
पुलिस ने प्रकरण में अभियुक्त अतर सिंह से हत्या में प्रयुक्त आला कत्ल की बरामदगी के उपरांत उसके विरूद्ध धारा-25/27 आयुध अधिनियम में मुकदमा पंजीकृत किया गया। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। न्यायालय में सुनवाई के दौरान कई गवाह पेश हुए और मुकर गए लेकिन अभियोजन की ओर से फोरेंसिक जांच रिपोर्ट और वादी की गवाही को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। न्यायालय ने फोरेंसिक जांच और वादी की गवाही को ठोस आधार मनाते हुए दोष सिद्ध किया।
उक्त मामले में न्यायालय में सुनवाई उपरांत दोषसिद्ध अभियुक्तगण अतर सिंह, हरीबाबू व रोहित प्रत्येक को दोषी पाते हुए धारा-302 सपठित धारा-34 भा०दं० सं० के अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा एवं 20 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया तथा अर्थदण्ड न अदा करने पर प्रत्येक अभियुक्त को एक -एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोषसिद्ध अभियुक्त अतर सिंह को धारा-25/27 आयुध अधिनियम के अपराध के लिए पांच वर्ष के कारावास की सजा एवं 5000 रूपये के अर्थदण्ड , अर्थदण्ड न अदा करने पर छः माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गयी।














