ट्रेनों पर पत्थर फेंकने वालों से लेकर ट्रैक बाधित करने वालों तक पर कसेगा शिकंजा

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डीजी जीआरपी का जीआरपी-आरपीएफ की संयुक्त पेट्रोलिंग पर जोर

लखनऊ (एसजेएन)। शुक्रवार को राजकीय रेलवे पुलिस मुख्यालय लखनऊ के सभागार से ऑनलाइन माध्यम से राज्य स्तरीय रेलवे सुरक्षा समिति की 12वीं समीक्षा गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में रेलवे सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन हुआ। इसमें रेल यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे अपराध पर जीरो टॉलरेंस को लेकर डीजी जीआरपी, उत्तर प्रदेश प्रकाश डी. ने सख्त रुख अपनाया है।

पत्थरबाजी और ट्रैक अवरोध पर कसेगा शिकंजा
डीजी जीआरपी ने ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण, ट्रैक अवरोध की घटनाओं की रोकथाम तथा जीआरपी और आरपीएफ द्वारा संयुक्त रूप से ट्रैक पेट्रोलिंग को और मजबूत करने पर जोर दिया। रेलवे सुरक्षा में आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई।

25 साल से जीआरपी की जनशक्ति में नहीं हुआ इजाफा
डीजी ने कहा कि भारतीय रेलवे देश की लाइफलाइन है और इसकी सुरक्षा सर्वोपरि है। रेलवे में पिछले वर्षों में ट्रेनों, यात्रियों, स्टेशनों और प्लेटफार्मों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन पिछले करीब 25 वर्षों में जीआरपी की जनशक्ति और आधारभूत ढांचे में कोई अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि रेलवे सुरक्षा से जुड़ी सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। जीआरपी की जनशक्ति, आधारभूत ढांचा, बजट और तकनीकी क्षमता में वृद्धि से सुरक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और कार्यक्षमता को और मजबूत किया जा सकता है।

डीपीआर में ही सुरक्षा का खाका तैयार करने पर जोर
डीजी जीआरपी ने रेलवे की बड़ी परियोजनाओं के डीपीआर स्तर पर ही सुरक्षा संबंधी प्रावधान शामिल किए जाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि परियोजनाओं की शुरुआत से ही सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखने से भविष्य की चुनौतियों से बेहतर ढंग से निपटा जा सकेगा।

रेलवे कर्मियों का पुलिस सत्यापन जरूरी
गोष्ठी में रेलवे कर्मियों और संविदा कर्मियों के अनिवार्य पुलिस सत्यापन तथा पहचान पत्र धारण करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही रेल यात्रियों की सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने तथा अपराध नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।

जीआरपी-आरपीएफ में बेहतर तालमेल पर जोर
डीजी जीआरपी ने स्पष्ट किया कि रेलवे सुरक्षा किसी एक एजेंसी की जिम्मेदारी नहीं है। यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जीआरपी, आरपीएफ और रेलवे की अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय आवश्यक है।

गोष्ठी में पुलिस महानिरीक्षक रेलवे लखनऊ आर.के. भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक रेलवे लखनऊ अनिल मिश्रा, अपर पुलिस अधीक्षक/स्टाफ ऑफिसर डीजी जीआरपी उत्तर प्रदेश अनिल कुमार सहित प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त (पीसीएसी) आरपीएफ (एनआर, एनईआर, एनसीआर, डब्ल्यूसीआर,ईसीआर ), आईजी सह प्रबन्धक/सुरक्षा, डीईसीसीआईेएल/ईडीएफसी प्रयागराज, डब्ल्यूडीएफसी अमहदाबाद/गुजरात, चीफ ट्रैक इंजीनियर (एनआर, एनईआर, एनसीआर, डब्ल्यूसीआर,ईसीआर ) एवं रेलवे/जीआरपी/आरपीएफ के अन्य वरिष्ठ अधिकारी ऑनलाइन वैचुअल के माध्यम से उपस्थित रहे।

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