साइबर ठग फर्जी थानों में अफसर बन डिजीटल अरेस्ट कर वसूली करते थे
झांसी। जिले के कटेरा थाना क्षेत्र के तीन गांवों में चल रहे साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया। पुलिस टीमों ने एक साथ गांव मौरयाना, खैरयाना और कडोर में एक साथ छापेमारी कर दर्जनों महिला-पुरुषों को हिरासत में लिया और साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, राउटर, पुलिस का सायरन समेत अन्य सामान बरामद कर लिया।शातिर ठगों ने थाने से लेकर पुलिस मुख्यालय तक फर्जी बना लिए थे और इनके माध्यम से डिजीटल अरेस्ट कर वसूली कर रहे थे।
पुलिस करीब एक महीने से इन गांवों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इस दौरान भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और केंद्रीय जांच एजेंसियों से भी इनपुट जुटाए गए। इनपुट के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार आधी रात के बाद गोपनीय तरीके से कार्रवाई की योजना तैयार की और किसी को भनक तक नहीं लगी। ठगों को पुलिस ने सोते में दबोच लिया।
7 सीओ, 300 पुलिसकर्मी और ड्रोन कैमरों से निगरानी
बताया जा रहा है कि इस पूरे ऑपरेशन में 7 सीओ, दो बस, दो पीएसी वाहन और करीब 300 पुलिसकर्मी शामिल रहे। पुलिस ने तीनों गांवों की घेराबंदी कर कार्रवाई शुरू की। इस दौरान इलाके की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरे का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे पूरे इलाके पर बारीकी से नजर रखी जा सके। इस अभियान को पूरी तरह गोपनीय रखने के लिए शहरी क्षेत्र के अलग-अलग थानों से पुलिस बल एकत्र किया गया था। गोपनीयता इतनी की कार्रवाई में शामिल पुलिस कर्मियों को भी अभियान की पूरी जानकारी पहले से नहीं दी गई थी। शुक्रवार आधी रात के बाद पुलिस की टीमें अचानक तीनों गांवों में एक साथ पहुंचीं और गांवों को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया गया। पुलिस के अचानक पहुंचने से गांवों में खलबली मच गई।
साइबर क्राइम के हाट स्पाट थे गांव
पुलिस के मुताबिक कटेरा थाना क्षेत्र के मौरयाना, खैरयाना और कडोर गांवों को साइबर अपराध के हॉट स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया था। पुलिस करीब एक महीने से इन गांवों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इस दौरान भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और केंद्रीय जांच एजेंसियों से भी इनपुट जुटाए गए। इनपुट के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार रात गोपनीय तरीके से कार्रवाई की योजना तैयार की।
पुलिस अधिकारी बन कर धमकाते थे
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य एफआईआर दर्ज कराने वाले लोगों के मोबाइल नंबर और अन्य जानकारी जुटाते थे। इसके बाद वे खुद को पुलिस अधिकारी या किसी जांच एजेंसी का कर्मचारी बताकर पीड़ितों को फोन करते थे। फोन पर केस में फंसाने या कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें धमकाया जाता था। इसके बाद अलग-अलग बहाने से उनसे रकम ठग ली जाती थी।
बरामद मोबाइल व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच
छापे में पकड़े गए 30 से अधिक महिला-पुरुषों से दिन भर अलग-अलग पूछताछ की जाती रही। बरामद मोबाइल फोन, राउटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ और उपकरणों की जांच से साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, उनके संपर्कों और ठगी के तरीके के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
खाकी वर्दी, पुलिस का लोगो दिखा कर व सायरन बजा कर शिकार को डराते थे
मिनी जामताड़ा के नाम से मशहूर हो चुके तीनों गांवों में जब पुलिस ने रेड की तो यहां से पुलिस सायरन, नकली वर्दी, पुलिस कैप और पुलिस का लोगो मिला। इनका प्रयोग साइबर फ्रॉड वीडियो कॉल कर शिकार को हाउस अरेस्ट के दौरान डराने में करते थे। पीड़ित को लगता था कि वाकई उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इसके बाद पीड़ित से मुकदमे में सेटिंग के नाम पर ठगी कर ली जाती थी।













