नवीन श्रम संहिताओं के श्रमिक विरोधी प्रावधानों पर भारतीय मजदूर संघ ने केंद्रीय श्रम मंत्री से की निर्णायक वार्ता
झांसी। नवीन श्रम संहिताओं में शामिल श्रमिक विरोधी प्रावधानों के विरोध में भारतीय मजदूर संघ के शीर्ष नेतृत्व ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से भेंट कर विस्तृत वार्ता की तथा श्रमिक हितों से संबंधित विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा।
भारतीय मजदूर संघ द्वारा दिनांक 17 अगस्त 2026 को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के माध्यम से जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपकर माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री तथा केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष नवीन श्रम संहिताओं में आवश्यक संशोधन की मांग उठाई गई थी। इसी क्रम में भारतीय मजदूर संघ के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को केंद्रीय श्रम मंत्री द्वारा बैठक के लिए आमंत्रित किया गया।
वार्ता के दौरान भारतीय मजदूर संघ ने औद्योगिक संबंध संहिता-2020 सहित नवीन श्रम संहिताओं के विभिन्न प्रावधानों पर अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखा। संगठन ने दो टूक कहा कि श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार की स्थिरता और ट्रेड यूनियन अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भारतीय मजदूर संघ ने प्रमुख रूप से मांग रखी कि सामाजिक सुरक्षा संबंधी प्रावधानों में ईपीएफ की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹30,000, बोनस की सीमा ₹21,000 से बढ़ाकर ₹42,000 तथा कर्मचारी राज्य बीमा की वेतन सीमा ₹21,000 से बढ़ाकर ₹42,000 की जाए। इसके साथ ही औद्योगिक संबंध संहिता एवं स्थायी आदेश लागू करने के लिए निर्धारित 300 श्रमिकों की सीमा को घटाकर पूर्व व्यवस्था के अनुरूप किया जाए तथा ‘हायर एंड फायर’ की नीति पर प्रभावी रोक लगाई जाए। ठेका श्रमिकों की सीमा समाप्त करने वाले प्रावधानों पर पुनर्विचार करने तथा निश्चित अवधि रोजगार (Fixed Term Employment) को नियमित प्रकृति के कार्यों में स्थायी रोजगार का विकल्प बनने से रोकने की मांग भी रखी गई।
भारतीय मजदूर संघ ने फिक्स्ड टर्म अपॉइंटमेंट को स्थायी मानवशक्ति के अधिकतम 10 प्रतिशत तक सीमित करने तथा नियमित प्रकृति के कार्यों में स्थायी रोजगार की व्यवस्था बहाल करने पर जोर दिया।
ट्रेड यूनियन की मान्यता के लिए निर्धारित 51 प्रतिशत सदस्यता की शर्त तथा नेगोशिएटिंग काउंसिल से संबंधित प्रावधानों को व्यावहारिक बनाने, ट्रेड यूनियन पंजीकरण में डीम्ड रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था जोड़ने, ‘कर्मी’ की परिभाषा में पर्यवेक्षकों के लिए निर्धारित ₹18,000 की वेतन सीमा बढ़ाने तथा हड़ताल के अधिकार से संबंधित नोटिस एवं अन्य नियमों में आवश्यक सुधार करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि श्रम संहिताओं का उद्देश्य यदि श्रम व्यवस्था को सरल और प्रभावी बनाना है तो उसमें श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को कमजोर करने वाले प्रावधानों का स्थान नहीं हो सकता।
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री ने भारतीय मजदूर संघ के तर्कों और उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरतापूर्वक सुना तथा प्रत्येक बिंदु पर विचार करने और श्रम संहिताओं में आवश्यक सुधार के लिए उचित संशोधन किए जाने का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधिमंडल में भारतीय मजदूर संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष एस. मल्लेशम, अखिल भारतीय महामंत्री सुरेंद्र कुमार पांडेय, अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी. सुरेंद्रन, अखिल भारतीय पूर्व अध्यक्ष हिरणमय पांडेय सहित शीर्ष पदाधिकारी उपस्थित रहे।
भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि देश के करोड़ों श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा एवं रोजगार की गारंटी के लिए संगठन अपना रचनात्मक, लोकतांत्रिक एवं निर्णायक संघर्ष निरंतर जारी रखेगा।
बैठक में उठाए गए श्रमिक हितों के मुद्दों पर भारतीय मजदूर संघ झांसी विभाग ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व द्वारा केंद्र सरकार के समक्ष श्रमिकों की वास्तविक समस्याओं को मजबूती से उठाया जाना स्वागतयोग्य है।
भारतीय मजदूर संघ झांसी विभाग के विभाग प्रमुख चंद्रकांत चतुर्वेदी, जिला अध्यक्ष वेद प्रकाश पुरोहित, संगठन मंत्री राजेश ठकुरानी, ओ पी शुक्ला अध्यक्ष बी एच ई एल, इमरत कुशवाहा,कोषाध्यक्ष यक्षेश सनोरिया उपाध्यक्ष मुकेश मिश्रा, संत प्रकाश वर्मा, महामंत्री,वरिष्ठ नागरिक परिसंघ के पी पांडे, जोनल संगठन मंत्री अनिल कुमार शुक्ला, हरिमोहन शर्मा, भानु प्रताप सिंह, संजय तिवारी, मनीष बाजपेई, दिलीप कुमार, सी पी शर्मा,हेमंत विश्वकर्मा, संजीव वर्मा, रामलखन, विजय नारायण शर्मा, रमाकांत सचान, अवधेश सक्सेना, ज्योति मिश्रा, ज्योति खरे, हेमंत नायक, पंकज पांडे,अंकित श्रीवास्तव,दीपक श्रीधर, अश्विनी गोस्वामी, आरती तमोरी, जगभान सिंह,राजू केवट, पुत्तू सिंह कुशवाहा, ओ पी शर्मा, राहुल शर्मा आदि कार्यकर्ताओं ने हर्ष व्यक्त किया।














