नौ दिन के लिए भक्तों द्वारा शरीर पर जवारे बो कर की जा रही कठोर साधना
झांसी। नव रात्रि पर भक्त जगत जननी की साधना पूजा अर्चना में लीन हैं। कहीं भक्तों द्वारा नौ दिन के लिए शरीर पर जवारे बो कर कठोर साधना की जा रही है।
इसी क्रम में श्री सिद्धेश्वर सिद्ध पीठ में माँ गायत्री के समक्ष, गुरूकुल के एक साधक व बचपन से ही मंदिर की सेवा में संलग्न भक्त शिवा वर्मा अपने शरीर पर व चारों ओर जवारे वो कर कठोर साधना में लीन हैं। नवरात्रि के चार दिन पहले एकाएक शिवा के मन में भाव उठा की मुझे शरीर पर जवारे बो कर माता की कठोर साधना करना चाहिए तभी इतने वर्षों की सेवा सफल हो सकती है और उसने सीधे गुरु जी से अपने मन की बात कही तथा विधि, व्यवस्था तथा नियम और मंत्र जाप ज्ञान प्राप्त कर नवरात्रि की यह सबसे कठोर साधना करने का प्रण किया तथा नवरात्रि से तीन दिन पहले से ही अन्न जल आदि का त्याग कर दिया और निरंतर सीधे लेटने का अभ्यास किया माता की कृपा से और गुरु देव का आशीर्वाद का संबल पाकर 11 अक्टूबर से अपने शरीर पर व चारों ओर खप्परों में ज्वारे वो कर माता के सामने लेट गया जहाँ चतुर्मुखी माँ विराजमान है और समीप में सिद्धों के सिद्ध गुरु गौरखनाथ को आसन दी गई ज्योति जल रही है तथा भक्त भी माता रानी के बुन्देली गीत गाकर इस तप साधना में सहभागी बन रहे हैं। गुरु जी के अनुसार यह भगवती जगदंबा की कृपा प्राप्त करने का कठिन हठ योग हैं पूर्व में बुंदेलखंड के जिन भक्तों ने ऐसी साधना की है उनको माता का दर्शन मिला और भक्त की वाणी सिद्ध होती रही।
दूसरा उदाहरण मऊरानीपुर के बुखारा गांव में गौरैया माता मंदिर में जानकी देवी ने अपने शरीर पर जवारे उगाए हैं। जानकी देवी का कहना है कि सपने में माता रानी के दर्शन होने के बाद उन्होंने यह संकल्प लिया था। उनकी इस साधना की चर्चा क्षेत्र में तेजी से हो रही है और माता के दर्शन करने के साथ इस अनोखी साधना को देखने के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। उन्होंने गौरैया माता के प्रति अपनी श्रद्धा और संकल्प के तहत शरीर पर जवारे उगाए हैं। उनका कहना है कि माता रानी के सपने में दर्शन होने के बाद उन्होंने यह संकल्प लिया। इसके बाद से उनकी साधना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
उक्त दोनों मंदिर परिसर में भक्तिभाव का माहौल बना हुआ है। श्रद्धालु इस साधना को अपनी-अपनी आस्था के नजरिये से देख रहे हैं और भक्ति भाव से मां भगवती की कृपा मान रहे हैं।














