भक्त व महात्माओं को मृत्यु का भय नहीं होता : हरिवंश दास 

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झांसी। काल तो सदैव हमारे पीछे लगा रहता है। काल दो प्रकार का होता है एक समय दूसरा मृत्यु और मृत्यु तो सबकी आनी ही है। भक्त व महात्माओं को मृत्यु का भय नहीं होता क्योंकि वह तो सदैव प्रभु के नाम जपता रहता है। हमारा और आपका भजन सिर्फ सांसारिक सुख प्राप्त करने के लिए ,जबकि भक्त और महात्माओं का भजन भगवान को प्राप्त करने के लिए महात्मा और भक्त ज्यादातर कष्टपूर्ण जीवन जीते हुए मिलते हैं क्योंकि वह कहते है यह कष्ट शरीर का है हमारा नहीं क्योंकि हम शरीर हैं ही नहीं, हम तो नित्य चेतन परमात्मा में रमण करने वाले हैं शरीर संसार में लगाने की वस्तु है और मन परमात्मा में परंतु हम मन संसार में लगाते हैं और शरीर परमात्मा में! गोस्वामी जी कहते है “सुखी मीन जहां नीर अगाधा जिन हरि शरण न एकहु बाधा” प्रवचन करते हुए मढ़िया महादेव मंदिर पर चल रही राम कथा में कथा प्रवक्ता हरिवंश दास ने यह उदगार व्यक्त किये।

उन्होंने भगवान के जनकपुर पहुंचने में जन्मतिथि शोभा का वर्णन “अति प्यारो जनकपुर धाम ,जहां प्रगटि श्री जनक नंदिनी” सुनाया तो श्रोता नाचने लगे। उन्होंने कहा कि महात्मा सदैव प्रसन्न होते हैं जबकि उनके पास अपना एक वस्त्र तक नहीं होता है क्योंकि वह सदैव परमात्मा की भक्ति में लगे रहते हैं जबकि हम सब सब कुछ होते हुए भी निरंतर और धन पाने की अभिलाषा में अपना समय व्यतीत करते रहते हैं। इसके बाद धनुष यज्ञ लीला और भगवान विवाह लीला का सुंदर मार्मिक वर्णन किया, अनेकों संतों के पद और भजन सुना कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

प्रारंभ में व्यासपीठ का पूजन डॉ नीरज श्रीवास्तव, रमेश चंद्र अग्रवाल, रोहित भारद्वाज ने किया अंत में मानस जी की आरती सुशील शर्मा, प्रदीप तिवारी, आशीष, रवि अनिल अर्जरिया, अंचल अर्जरिया, डॉ संजय त्रिपाठी, पुजारी रामेश्वर प्रसाद उपाध्याय ने किया। आभार गया प्रसाद ने किया।

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