गृह कलेश से त्रस्त व्यवसाई द्वारा खुदकुशी, जेब से मिला सुसाइड नोट
झांसी। थाना मऊरानीपुर क्षेत्र अंतर्गत देवरी सिंह पुरा बस स्टैंड के पास निवासी सीमेंट, गट्टी, सरिया कारोबारी (60 वर्ष) आए दिन बेटे से गृहक्लेश से इतना त्रस्त हो गया कि उसने ज़हर खा कर सुसाइड कर लिया और मरने के पहले सोसाइड नोट में लिखा उसकी अर्थी को बेटा कंधा नहीं दे। ज़हर के असर दिखाने पर घबराए कारोबारी ने अपने फूफा को फोन कर जानकारी दी और कहा- मुझे बचा लो। फूफा समेत अन्य परिजन उनको मऊरानीपुर सीएचसी ले गए जहां से झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दियागया। यहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतक की जेब से निकले सुसाइड नोट में लिखा था- मेरे मरने के बाद बेटा मेरी अर्थी को कंधा न दे। मैं 3 लोगों से परेशान होकर अपनी जान दे रहा हूं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
मृतक का नाम घनश्याम दास सेन (60) पुत्र मकरध्वज सेन था। वह मऊरानीपुर के देवरी सिंहपुरा बस स्टैंड पर रहते थे। घनश्याम दास के फूफा कैलाश चंद्र ने बताया-मेरे भतीजे घनश्याम दास सेन की रानीपुर बस स्टैंड पर गिट्टी, सीमेंट और सरिया की दुकान चलाते थे। उनके दो बेटे रिंकू और पिंटू व दो बेटी मीनू और सोनम हैं। चारों की शादी हो चुकी है। रुपए – पैसों को लेकर बेटे से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते मंगलवार दोपहर को भतीजे ने जहर खा लिया। फिर मुझे और भतीजे राजू उर्फ शरद कुमार को फोन लगाया। बताया कि जहर खा लिया और बचा लो। वह लोग उन्हें लेकर मऊरानीपुर सीएचसी लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों ने रेफर कर दिया। यहां झांसी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने घनश्याम को मृत घोषित कर दिया।
मृतक की जेब से एक पेज का सुसाइड नोट मिला। जिसमें लिखा है-मेरे मरने के बाद मेरा अंतिम संस्कार मेरे तीनों भाई, मेरा बड़ा बेटा और बड़ा नाती करेगा। इसके अलावा मुझे कोई मुझे कंधा नहीं देगा। मैं तीन लोगों से अत्यंत परेशान होकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर रहा हूं। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम उपरांत परिजनों को सौंप दिया है।














