झांसी। झांसी–मानिकपुर दोहरीकरण परियोजना के अंतर्गत खुरहंड–अतर्रा–बदौसा रेल खंड के दोहरीकरण कार्य का दो दिवसीय निरीक्षण रेल संरक्षा आयुक्त (उत्तर-पूर्व परिमंडल) प्रणजीव सक्सेना द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) अजीत सिंह यादव, झांसी मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार उपस्थित रहे।
निरीक्षण के पहले दिन 22 जुलाई को सर्वप्रथम बदौसा स्टेशन के स्टेशन रूम एवं रिले रूम का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। रेल संरक्षा आयुक्त ने इंटरलॉकिंग व्यवस्था, सिग्नलिंग प्रणाली, संरक्षा मानकों तथा परिचालन व्यवस्थाओं का गहन अवलोकन करते हुए विभिन्न तकनीकी पहलुओं का बारीकी से मूल्यांकन किया।
इसके उपरांत बदौसा स्टेशन परिसर में रेल संरक्षा आयुक्त प्रणजीव सक्सेना, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) अजीत सिंह यादव एवं मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार ने पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण एवं हरित रेलवे का संदेश दिया। अधिकारियों के आह्वान पर एक नन्हें बालक ने भी पौधारोपण कर उसके संरक्षण का संकल्प लिया, जिससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी का प्रेरक संदेश प्रसारित हुआ।
इसके बाद अधिकारियों ने बदौसा–अतर्रा रेल खंड का मोटर ट्रॉली के माध्यम से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नवनिर्मित ट्रैक, रेल पुलों, समपार फाटकों एवं अन्य आधारभूत संरचनाओं का गहन परीक्षण करते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता, संरक्षा मानकों तथा परिचालन तैयारियों का सूक्ष्म आकलन किया गया।
तदोपरांत रेल संरक्षा आयुक्त ने अतर्रा स्टेशन का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान स्टेशन की संरक्षा व्यवस्थाओं, स्टेशन मास्टर कक्ष, सिग्नलिंग प्रणाली तथा परिचालन तैयारियों का गहन परीक्षण किया गया। साथ ही विभिन्न तकनीकी एवं संरक्षा संबंधी पहलुओं का सूक्ष्म मूल्यांकन करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
निरीक्षण के पहले दिन अब तक 14 किलोमीटर ट्रैक का निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण अभी सूर्य ढलने तक जारी रहा I शेष निरीक्षण तथा स्पीड ट्रायल 23 जुलाई को किया जायेगा I
झांसी–मानिकपुर दोहरीकरण परियोजना के अंतर्गत खुरहंड–अतर्रा–बदौसा रेल खंड का दोहरीकरण पूर्ण होने से इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर ट्रेनों के संचालन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे रेल परिचालन अधिक सुरक्षित, सुचारु एवं समयबद्ध होगा तथा यात्रियों और माल परिवहन को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी। साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी।














