नीली जर्सी हमारी पहचान व करोड़ों हॉकी प्रेमियों की भावनाओं का प्रतीक : अशोक ध्यानचंद

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झांसी। भारतीय हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी को बदलने की चर्चाओं के बीच 1975 हॉकी विश्व कप विजेता टीम के नायक एवं हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के पुत्र अशोक कुमार ध्यानचंद ने झांसी स्थित अपने निवास पर खेल विश्लेषक बृजेंद्र यादव से विशेष बातचीत में इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि नीली जर्सी केवल एक रंग नहीं, बल्कि भारतीय हॉकी की पहचान, गौरवशाली विरासत और करोड़ों हॉकी प्रेमियों की भावनाओं का प्रतीक है।

अशोक कुमार ने कहा कि उन्होंने बचपन से नीली जर्सी पहनकर हॉकी खेली है और हर खिलाड़ी के लिए यह दूसरी त्वचा की तरह होती है। उन्होंने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन इस ऐतिहासिक जर्सी के रंग को बदलने की बात होगी। भारतीय हॉकी की नीली जर्सी देश की पहचान बन चुकी है और इससे करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं।”

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी कारणवश दूसरी जर्सी की आवश्यकता महसूस होती है तो वैकल्पिक रंग की दूसरी जर्सी बनाई जा सकती है, लेकिन पारंपरिक नीली जर्सी को हर हाल में बरकरार रखा जाना चाहिए। दुनिया की अधिकांश टीमों के पास दो जर्सियां होती हैं और भारत भी यही व्यवस्था अपना सकता है।

हॉकी इंडिया की भूमिका पर बोलते हुए अशोक कुमार ने कहा कि इतना महत्वपूर्ण निर्णय बिना खिलाड़ियों और हॉकी इंडिया से व्यापक चर्चा किए नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने खेलों को राजनीति से दूर रखने की भी अपील करते हुए कहा कि खेल का उद्देश्य खिलाड़ियों और देश का सम्मान बढ़ाना है, इसलिए इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
1975 विश्व कप फाइनल की यादें साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक गोल उनके जीवन का सबसे यादगार क्षण रहा। उसी जीत के साथ भारत ने अपना पहला और अब तक का एकमात्र हॉकी विश्व कप खिताब जीता था।

बातचीत के अंत में अशोक कुमार ने कहा कि नीली जर्सी केवल एक रंग नहीं है, यह भारतीय हॉकी की आत्मा, हमारी विरासत और करोड़ों प्रशंसकों के गर्व का प्रतीक है। इसे किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।

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