अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दोनों की अर्जी खारिज कर दी
प्रयागराज (संवाद सूत्र)। झांसी में कार एक्सीडेंट में मृत अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद के जनाजे (अंतिम संस्कार) में शामिल होने के लिए उसके बड़े भाई उमर व अली ने हाईकोर्ट में पैरोल की अर्जी दी। देखते हैं कि अबान के जनाजे में भी हो पाएगा अतीक अहमद के बेटों का मिलन या आखिरी दीदार को तरस जाएंगे अली और उमर।
गुरुवार को झांसी में कार एक्सीडेंट में अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की मौत हो गई थी। कल से सबकी नजर इसी पर थी कि अब जिंदा बचे तीन भाई अबान को आखिरी विदाई देने आएंगे। मगर, अली और उमर को बड़ा झटका लगा है और उन्होंने हाई कोर्ट में गुहार लगाई है। दरअसल, अली और उमर को छोटे भाई आबान का अंतिम दर्शन करने और सुपुर्द-ए-खाक में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत अथवा पैरोल नहीं मिल सकी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश मिश्रा ने दोनों की अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी कि विचारण न्यायालय के पास इस प्रकार की अंतरिम जमानत या पैरोल देने की शक्ति का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है. हालांकि, अदालत ने उन्हें सक्षम प्राधिकारी या सक्षम न्यायालय के सामने विधि के अनुसार प्रार्थनापत्र देने की स्वतंत्रता दी है।
अली झांसी जेल और उमर लखनऊ की जेल में बंद हैं। उनकी तरफ से प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि उनके छोटे भाई अबान की सड़क दुर्घटना में जान चली गई है, जिसके अंतिम संस्कार में शामिल होना उनका मानवीय, पारिवारिक और धार्मिक दायित्व है। प्रार्थनापत्र में यह भी कहा गया कि इस्लाम धर्म में मृतक के अंतिम संस्कार और सुपुर्द-ए-खाक में परिवार के सदस्यों की उपस्थिति का विशेष महत्व है तथा संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार में इस प्रकार के पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन भी शामिल है। अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि विचाराधीन बंदियों को अंतरिम जमानत अथवा पैरोल पर रिहा किए जाने का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है।
गौरतलब है कि अबान की असमय मृत्यु से उसके तीनों भाइयों को बड़ा झटका लगा है। अतीक के बेटों को लग रहा था कि कम से कम अबान के जनाजे पर उनका मिलन हो जाएगा पर कहा जाता है कि पाप-पुण्य यहीं हैं। सोचिए अबान जिस भाई अली अहमद से इतना प्यार करता था, वो ही क्या उसे आखिरी विदाई नहीं दे सकेगा ?
यहां किया जाएगा सुपुर्द ए खाक
अबान के पोस्टमार्टम के बाद सुपुर्द-ए-खाक को लेकर बताया गया कि कसारी मसारी स्थित उनके पुश्तैनी कब्रिस्तान में पिता अतीक अहमद, चाचा अशरफ और बड़े भाई असद के कब्र के पास ही दफन किया जाएगा। वहीं, लग रहा था कि इस मौके पर अली, उमर और अहजम अहमद की मुलाकात होगी। तीनों अपने लाड़ले भाई को आखिरी विदाई देंगे। मगर, कोर्ट इनके मिलन के बीच आ गया है पर उम्मीद हाईकोर्ट से लगी हुई हैं।














