एआईटीएमजी अध्यक्ष रोमेश चौबे ने संयुक्त महासचिव NFIRअशोक शर्मा से की मुलाकात
भोपाल। ऑल इंडिया ट्रेन मैनेजर ग्रुप (AITMG) के अध्यक्ष एवं भोपाल मंडल के ट्रेन मैनेजर रोमेश चौबे एवं उनकी टीम जिनमें अश्विनी कुमार शर्मा, मनीष सोनी पैसेंजर ट्रेन मैनेजर भोपाल ने ट्रेन मैनेजर कैडर की प्रमुख मांगों एवं वेतनमान उन्नयन के विषय में अशोक शर्मा, संयुक्त महासचिव NFIR एवं महामंत्री WCRMS से मुलाकात कर चर्चा की।
इस दौरान ट्रेन मैनेजरों की जिम्मेदारियों, रेलवे परिचालन में उनकी महत्वपूर्ण सुरक्षा भूमिका तथा 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष प्रारंभिक वेतनमान Level-7 (ग्रेड पे ₹4,600 के समकक्ष) की मांग को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया। श्री चौबे ने ट्रेन मैनेजरों की तकनीकी दक्षता, कार्य के दौरान जोखिम, आपात परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने की जिम्मेदारी और यात्रियों की सुरक्षा में उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि NFIR के माध्यम से ट्रेन मैनेजर कैडर की जायज मांगों को संबंधित मंचों पर मजबूती से उठाया जाएगा।
AITMG का उद्देश्य देशभर के ट्रेन मैनेजरों को एकजुट कर उनकी समस्याओं, सम्मान, पदोन्नति और वेतनमान से जुड़े विषयों को उचित स्तर तक पहुँचाना है। यह मुलाकात इसी दिशा में जारी प्रयासों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। रेल की धड़कन ट्रेन मैनेजर: यात्रियों की जान बचाने वाले इस प्रहरी की आवाज अब 8वें वेतन आयोग तक पहुँचेगी
रोमेश चौबे के नेतृत्व में AITMG की पहल, अशोक शर्मा और डॉ. एम. राघवैया के माध्यम से ट्रेन मैनेजर संवर्ग की प्रारंभिक वेतन संरचना को लेवल-7 तक उन्नत करने की मांग को मिला महत्वपूर्ण मंच
भारतीय रेलवे की सफलता केवल आधुनिक इंजन, तेज रफ्तार ट्रेनों, कवच जैसी सुरक्षा प्रणालियों और विशाल रेल नेटवर्क से नहीं मापी जा सकती। इसकी असली सफलता इस बात में है कि प्रतिदिन लाखों यात्री सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुँचें और देश की आर्थिक जीवनरेखा बिना बाधा चलती रहे। इस विशाल व्यवस्था में ट्रेन मैनेजर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वह केवल ट्रेन के अंतिम डिब्बे में तैनात कर्मचारी नहीं, बल्कि ट्रेन की अखंडता पर नजर रखने वाला, परिचालन समन्वय करने वाला और संकट के समय तत्काल कार्रवाई करने वाला एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रहरी है।
लेखक दीपक कुमार की पुस्तक ‘रेल की धड़कन – ट्रेन मैनेजर’ इसी वास्तविकता को समाज और नीति-निर्माताओं के सामने रखती है। पुस्तक का संदेश स्पष्ट है—जिम्मेदारी, साहस, सतर्कता और समर्पण केवल शब्द नहीं, बल्कि सुरक्षित रेल संचालन की बुनियाद हैं।
जब कुछ मिनटों का निर्णय किसी की जिंदगी बचा सकता है
ट्रेन मैनेजर की जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण AITMG अध्यक्ष एवं भोपाल मंडल के मेल ट्रेन मैनेजर श्री रोमेश चौबे हैं। गाड़ी संख्या 12975 (इटारसी–भोपाल) में उन्होंने चलती ट्रेन से गिरे यात्री श्री रामवीर कोहली को देखकर तत्काल ट्रेन रोकने की कार्रवाई की। उन्होंने घायल यात्री को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने, प्राथमिक उपचार देने और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह घटना ट्रेन मैनेजर की सतर्कता, त्वरित निर्णय क्षमता और मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाती है। आपात स्थिति के शुरुआती Platinum Minutes में लिया गया सही निर्णय किसी की जान बचाने में निर्णायक हो सकता है।
देशभर में ट्रेन मैनेजरों की ऐसी अनेक घटनाएँ उनके सुरक्षा योगदान को उजागर करती हैं। “हर 15 मिनट में एक जीवन बचाने और हर 6 घंटे में एक संभावित घटना रोकने” का संदेश उनके योगदान को रेखांकित करता है, हालाँकि इन आँकड़ों की पुष्टि के लिए आधिकारिक राष्ट्रीय रिकॉर्ड आवश्यक है।
सुरक्षा की जिम्मेदारी के अनुरूप वेतन संरचना क्यों नहीं?
ट्रेन मैनेजर का कार्य निर्धारित संकेत देने तक सीमित नहीं है। उसे ट्रेन की अखंडता, ब्रेक की निरंतरता, वैगनों या कोचों में दिखाई देने वाली असामान्य स्थिति, हॉट एक्सल, ब्रेक बाइंडिंग, लटकते उपकरण, धुआँ, आग तथा अन्य संभावित खतरों पर नजर रखनी होती है। ट्रेन के असामान्य रूप से रुकने, ट्रेन पार्टिंग, दुर्घटना या अन्य आपातकालीन स्थिति में निर्धारित नियमों के अनुसार ट्रेन की सुरक्षा, सूचना-संचार और राहत कार्यों में सहयोग करना भी महत्वपूर्ण है।
यह जिम्मेदारी कठिन कार्य-परिस्थितियों में निभाई जाती है। अनियमित ड्यूटी, रात में काम, मौसम की प्रतिकूलता, घर से दूर रहना और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेना इस पद की वास्तविक चुनौतियाँ हैं। इसलिए वेतन और संवर्गीय संरचना पर विचार करते समय केवल पदनाम नहीं, बल्कि शैक्षणिक योग्यता, तकनीकी प्रशिक्षण, वास्तविक कार्यभार, जोखिम, जवाबदेही और सुरक्षा में योगदान को भी महत्व मिलना चाहिए।
AITMG द्वारा NFIR को प्रस्तुत तकनीकी प्रतिवेदन में ट्रेन मैनेजर के प्रारंभिक वेतन स्तर को वर्तमान लेवल-5 से लेवल-7 (पूर्व-संशोधित ग्रेड पे ₹4,600 के समकक्ष) तक उन्नत करने की मांग रखी गई है। प्रतिवेदन में ट्रेन मैनेजर संवर्ग की सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों, तकनीकी दक्षता, परिचालन जवाबदेही और कार्य-परिस्थितियों को इस मांग का आधार बनाया गया है।
यह मांग केवल आर्थिक लाभ का प्रश्न नहीं है। इसका उद्देश्य जिम्मेदारी और संस्थागत मान्यता के बीच उचित संतुलन स्थापित करना है। वेतन संरचना में सुधार के साथ कैडर विकास, पदोन्नति, प्रशिक्षण, विश्राम सुविधाओं और आधुनिक तकनीकी संसाधनों पर भी विचार होना चाहिए।
8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सामने उठेगी आवाज
ट्रेन मैनेजर संवर्ग की मांगों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए संगठनात्मक स्तर पर किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण हैं। AITMG के अध्यक्ष एवं भोपाल के ट्रेन मैनेजर श्री रोमेश चौबे के नेतृत्व में विभिन्न रेलवे जोनों के ट्रेन मैनेजर इस विषय को एक साझा मंच पर उठा रहे हैं।
इस प्रयास में अशोक शर्मा, Joint General Secretary, NFIR एवं General Secretary, WCRMS, की भूमिका महत्वपूर्ण है। AITMG द्वारा उन्हें सौंपे गए विस्तृत तकनीकी प्रतिवेदन का उद्देश्य यह है कि ट्रेन मैनेजरों की वास्तविक जिम्मेदारियाँ, कार्य-परिस्थितियाँ और वेतन उन्नयन की मांग 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष तथ्यों और तर्कों के साथ रखी जा सके।
NFIR के महासचिव डॉ. एम. राघवैया तथा कर्मचारी पक्ष के अन्य प्रतिनिधियों द्वारा वेतन संरचना और संवर्गीय उन्नयन से जुड़े विषयों को आगे बढ़ाने के प्रयास भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। AITMG की अपेक्षा है कि अशोक शर्मा, NFIR के नेतृत्व के सहयोग से, ट्रेन मैनेजर संवर्ग की लेवल-7 प्रारंभिक वेतन संरचना की मांग को आयोग के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत करेंगे।
यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर समझना आवश्यक है: मांग को प्रतिनिधित्व में शामिल करना और आयोग द्वारा उसे स्वीकार किया जाना दो अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं। अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों और संबंधित सरकारी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। लेकिन किसी भी न्यायसंगत मांग के लिए तथ्यात्मक आधार, स्पष्ट तर्क और संगठित प्रतिनिधित्व आवश्यक हैं।
ट्रेन मैनेजर का सम्मान, रेलवे सुरक्षा का सम्मान
भारतीय रेलवे की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। लोको पायलट, स्टेशन मास्टर, सिग्नल एवं दूरसंचार कर्मचारी, इंजीनियरिंग और कैरिज एवं वैगन विभाग सहित प्रत्येक संवर्ग की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी व्यवस्था में ट्रेन मैनेजर की सतर्कता ट्रेन की स्थिति पर नजर रखने, संभावित खतरे की पहचान करने और आपातकालीन समन्वय में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इसलिए ट्रेन मैनेजर की मांगों को किसी संवर्ग की प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं, बल्कि सुरक्षित और सक्षम रेलवे व्यवस्था को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उचित वेतन, बेहतर कार्य-परिस्थितियाँ, पर्याप्त विश्राम, आधुनिक उपकरण और जिम्मेदारी के अनुरूप पेशेवर पहचान से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और परिचालन क्षमता को भी लाभ मिलेगा।
रोमेश चौबे का जीवनरक्षक उदाहरण इस जिम्मेदारी का मानवीय चेहरा है, जबकि अशोक शर्मा और NFIR के माध्यम से 8वें वेतन आयोग तक पहुँचने वाला तकनीकी प्रतिवेदन इस जिम्मेदारी की संस्थागत पहचान की मांग है। AITMG का प्रयास इन्हीं दोनों पहलुओं—मैदान पर निभाई जाने वाली जिम्मेदारी और नीति-निर्माण के स्तर पर मिलने वाली मान्यता—को जोड़ने का है।
अंततः, ट्रेन मैनेजर केवल ट्रेन के अंतिम छोर पर खड़ा कर्मचारी नहीं है। वह यात्रियों के विश्वास, परिचालन अनुशासन और रेलवे सुरक्षा की महत्वपूर्ण कड़ी है। उसकी सतर्कता का सम्मान करना, उसकी समस्याओं को सुनना और उसकी जिम्मेदारियों के अनुरूप न्यायसंगत सेवा संरचना पर विचार करना समय की आवश्यकता है।
रेल की धड़कन को मजबूत करना है, तो ट्रेन मैनेजर की जिम्मेदारी को पहचानना होगा। और जब जिम्मेदारी को उचित सम्मान मिलेगा, तभी ‘जिम्मेदारी, साहस, सतर्कता और समर्पण’ का संदेश भारतीय रेलवे की सुरक्षा संस्कृति को और मजबूत बना सकेगा।
‘रेल की धड़कन – ट्रेन मैनेजर’ पुस्तक से सामने आई ट्रेन मैनेजरों की वास्तविक कार्यप्रणाली
दीपक कुमार द्वारा लिखित पुस्तक ‘रेल की धड़कन – ट्रेन मैनेजर’ ने ट्रेन मैनेजरों की वास्तविक कार्यप्रणाली, तकनीकी जिम्मेदारियों, कठिन कार्य परिस्थितियों और रेलवे एवं यात्री सुरक्षा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को जनमानस के सामने लाने का कार्य किया है।
इस पुस्तक के माध्यम से लोगों को समझने का अवसर मिला है कि ट्रेन मैनेजर केवल ट्रेन के साथ चलने वाला कर्मचारी नहीं, बल्कि रेलवे सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण प्रहरी है, जिसकी सतर्कता, साहस, तकनीकी दक्षता और त्वरित निर्णय क्षमता यात्रियों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है।













