झांसी। राम कथा करते हुए हरिवंश दास महाराज ने कहा कि सुख है कहां सुख है सिर्फ शांति में शांति की अभिलाषा क्यों करते है शांति कब प्राप्त होती है जब हमारे षड विकार समाप्त होंगे षठ विकार है क्या काम क्रोध, मद ,लोभ,कामनाएं, द्बेष आदि और यह सब शांत होती है रामचरितमानस का पाठ करने से रामचरितमानस के पाठ से शांति मिलेगी और शांति प्राप्त होगी तो सुख प्राप्त होगा अगर सुख की चाहत है तो भगवान की शरण में आईये भगवान के शरण में आने का प्रथम तरीका है भगवान की कथा का श्रवण करना कलयुग के कितने भी अवगुणों को कमाने के बाद भी आप कथा श्रवण के लिए कुछ समय निकालते हैं तो कलि काल के दोषों का समन होता है और आप सुख की और बढ़ते हैं।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति रामचरितमानस का पाठ करने बैठता है तो सरस्वती उसके हृदय में विराजमान हो जाती हैं विश्वास करने की आवश्यकता है रामायण भगवान राम का घर है इसके बाद रामचरितमानस के मंगलाचरण का बहुत ही सुंदर व्याख्यान सुंदर भजन प्रस्तुति दी इससे श्रोता झूमने लगे। प्रारंभ में ग्रंथ का पूजन राजकुमार गोस्वामी, राकेश तिवारी, अर्पित् मंदिर के पुजारी रामेश्वर प्रसाद उपाध्याय, विनोद समाधिया, उर्वशी भट्ट, पुष्पा दीक्षित, अनिल बुधरानी, अंचल अरजरिया आदि ने किया।














