एक हज़ार सीसी टीवी फुटेज खंगाल कर पकड़े, गिरोह के एक सदस्य की तलाश
बांदा संवाद सूत्र। 31 मार्च को जबलपुर से लखनऊ जा रही चित्रकूट एक्सप्रेस (15206) के एसी द्वितीय कोच में बांदा के पास हुई लाखों की चोरी का खुलासा कर दिया गया है। जीआरपी ने चोरों को पकड़ने के लिए जबलपुर से बांदा तक करीब एक हजार सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल कर मामा भांजा गैंग के दो शातिरों को दबोच कर करीब 40 ग्राम सोना व 7500 रुपये बरामद कर लिए हैं। एक और आरोपी की तलाश जारी है।
दरअसल, 31 मार्च को जबलपुर से लखनऊ जा रही चित्रकूट एक्सप्रेस (15206) के एसी द्वितीय कोच में यात्रा कर रहे अनुराग जैन का बैग बांदा के पास चोरी हो गया था। इस बैग में करीब 25 लाख रुपये की ज्वैलरी और नगदी रखी हुई थी। मामला जीआरपी थाने में दर्ज होने के बाद जीआरपी, आरपीएफ और सिविल पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान टीम ने आईओडब्ल्यू कार्यालय बांदा के पास से सुरेंद्र वर्मा निवासी गीता नगर, काकादेव, कानपुर नगर और उसके भांजे रवि वर्मा को गिरफ्तार कर लिया। गिरोह में शामिल सुरेंद्र का भाई धर्मेंद्र कुमार फरार है। पूछताछ में शातिर चोरों की चलती ट्रेन में माल उड़ाने की प्रक्रिया ऐसी थी की पीड़ित को भनक तक नहीं लगती थी।
रेकी करने के बाद करते थे चोरी
बताया गया कि आरोपी कानपुर में किराये का मकान लेकर रहते थे और फर्जी पहचान पत्रों के जरिए एसी द्वितीय कोच में आरक्षण कराकर यात्रा करते थे। कोच में रेकी कर मौका मिलने पर शिकार का माल चोरी कर बीच स्टेशन पर उतर जाते और सड़क मार्ग से फरार हो जाते थे। गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था- एक गुर्गा सामान उठाता, दूसरा उसे लेता और तीसरा गेट पर खड़ा होकर उतरने का इंतजार करता था। इसके बाद तीनों अलग-अलग तरीके से बाहर निकलकर फरार हो जाते थे।
चोरी के बाद मिले सोने के आभूषण को गला कर बिस्कुट जैसी थप्पी बना लेते थे, जिससे पहचान छिपाई जा सके। गिरफ्तार आरोपियों के पास से चार फर्जी वोटर आईडी, 24,825 रुपये के अग्रिम तिथियों के एसी कोच के आरक्षण टिकट और करीब 40 ग्राम सोना व 7500 रुपये बरामद हुए हैं।
एक हजार सीसीटीवी खंगाले तब पकड़े गए आरोपी
बताया गया है कि घटना के बाद सक्रिय टीमों ने जबलपुर से बांदा स्टेशन तक करीब एक हजार सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। इसके जरिये आरोपियों की पहचान कर उनकी लोकेशन ट्रेस की गई।
अग्रिम टिकट लेकर करते थे वारदात
गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था-अग्रिम टिकट लेकर करते थे वारदात ताकि चेकिंग में पकड़े नहीं जाएं। कोच में शिकार सामान एक गुर्गा उठाता, दूसरा उसे लेता और तीसरा गेट पर खड़ा होकर उतरने का इंतजार करता था। इसके बाद तीनों अलग-अलग तरीके से बाहर निकलकर फरार हो जाते थे।














