झांसी। बुंदेलखंड कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर केन्द्रित एकात्म मानववाद पर संगोष्ठी आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता समाजशास्त्र के विद्वान एवं विचारक डॉ सुरेन्द्र नारायण ने दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को समसामयिक संदर्भ में रेखांकित किया। आपने बताया कि दीनदयाल जी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सामाजिक आर्थिक संतुलन पर बल देते थे। उन्होंने जीवन पर्यंत राष्ट्रसेवा और भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए कार्य किया।
समाजशास्त्र के सहायक प्रोफेसर डा.नरेंद्र गुप्ता ने बताया कि बगैर दीनदयाल जी को जाने समाजशास्त्र का पाठ्यक्रम अधूरा है। उनका सामाजिक योगदान व्यावहारिक समाजशास्त्र की नींव रखता है। विभाग प्रभारी प्रोफेसर जितेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि दीनदयाल जी उन विचारकों में से थे जिन्होंने भारतीय समाज की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक वैचारिक ढांचा प्रस्तुत किया। उन्होंने एकात्म मानववाद की अवधारणा को विकसित किया जो भारतीय परंपराओं, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, स्वदेशी अर्थव्यवस्था और अंत्योदय पर आधारित थी। उनका विचार दर्शन पश्चिमी राजनीति और आर्थिक प्रणालियों से भिन्न था तथा भारत की सांस्कृतिक-सांस्कृतिक विरासत एवं सामाजिक संरचना को केंद्र में रखता था। कार्यक्रम का संचालन डॉ रामदरश सिंह यादव एवं डॉ धर्मेन्द्र पाण्डेय ने किया तथा आभार डॉ॰ राजेश तिवारी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर समाजशास्त्र के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।














