झांसी। “स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर इन दिनों आम उपभोक्ता परेशान है क्योंकि उन्हें सही मायने में इसकी कार्यप्रणाली की जानकारी नहीं है और अधकचरी जानकारी समस्या को सुरसा के मुंह की तरह विशाल होती जा रही है, राजनैतिक दलों द्वारा समस्या के समाधान में सहयोग करने के विपरीत जनाक्रोश का फायदा उठाकर राजनैतिक रोटियां सेंकना शुरू कर दी गई हैं। ऐसे में sahujagran.com ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर से संबंधित अनसुलझे सवालों के जबाव चरणबद्ध तरीके से देने का प्रयास किया जा रहा है। संभावना है कि उपभोक्ताओं के सवालों का जवाब मिल पाएगा।”
इस संबंध में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लि० द्वारा भी जनहित में उपभोक्ता मार्ग दर्शिका जारी कर उपभोक्ताओं को वास्तविक स्थिति से अवगत करा कर समस्या के समाधान का प्रयास किया गया है। भाग -3
नोटः उपरोक्त उदाहरण में बिजली की खपत एवं उपभोक्ता का विद्युत भार समझाने के उद्देश्य से लिये गये है। वास्तविक स्थिति में हर उपभोक्ता का विद्युत भार और रोज की खपत अलग-अलग होती है। यदि कोई उपभोक्ता स्वीकृत भार से अधिक लोड इस्तेमाल करता है या स्वीकृत श्रेणी से अलग तरीके से बिजली का उपयोग करता है, तो उसके बिजली दर (टैरिफ) व अन्य अधिभार आदि में कमी या बढ़ोत्तरी हो सकती है।
प्रश्न 21- अगर मेरा पिछला बिल बकाया है, तो क्या मेरी बिजली काट दी जाएगी?
उत्तर- नहीं। आपका कनेक्शन केवल प्रीपेड बैलेंस खत्म होने पर ही कटता है। स्मार्ट मीटर लगने से पहले के बकाये पर बिजली नहीं कटती। प्रीपेड में बदलने के बाद पिछले बकाये के भुगतान के लिए आपको समय दिया जाता है। बकाये की राशि को ‘Arrears’ कॉलम में दिखाया जाता है और इसे किश्तों में चुकाने की सुविधा भी उपलब्ध है।
प्रश्न 22- रिचार्ज करने पर पूरा पैसा बैलेंस में क्यों नहीं जुड़ता?
उत्तर- यदि आपके खाते पर पिछला बकाया (Post-paid Arrear) है, तो नीचे दी गयी तालिका के अनुसार आपके रिचार्ज का एक निश्चित प्रतिशत पुराने बकाये के सापेक्ष स्वत कट जाता है। शेष राशि आपके वर्तमान उपयोग के लिए उपलब्ध होती है।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए
मूल बकाया (रुपये में)
प्रत्येक रिचार्ज से पोस्ट-पेड बकाया के विरुद्ध समायोजित की जाने वाली राशि (%)
10%
15%
20%
10,000 रुपये तक
10,000 से अधिक और 15,000 तक
15,000 से अधिक और 20,000 तक
20.000 से अधिक
कम से कम 25%
अन्य सभी उपभोक्ताओं के लिए, प्रत्येक रिचार्ज राशि का कम से कम 25% पोस्टपेड बकाया राशि में समायोजित किया जाएगा।
प्रश्न 23- क्या मैं पिछले बकाये का एक साथ भुगतान कर सकता हूँ?
उत्तर- हाँ। आप विभागीय काउंटर, UPPCL Smart App, जन सुविधा केंद्र (CSC) तथा फिनटेक एजेंसी-सहज, व्यमटेक, सरल एवं बी०एल०एस० के माध्यम से एकमुश्त बकाया चुका सकते हैं। इससे आप बकाये पर भविष्य में लगने वाले विलम्ब शुल्क (ब्याज) से बच सकेंगे। विद्युत सखी के माध्यम से बकाये के भुगतान की सुविधा शीघ्र विकसित की जा रही है।
प्रश्न 24- मुझे कितना रिचार्ज करना चाहिये?
उत्तर- यह सुझाव है कि बार-बार रिचार्ज की प्रक्रिया से बचने के लिए आपको इतना रिचार्ज करना चाहिए कि पोस्टपेड बकाये में समायोजन के बाद आपके प्रीपेड बैलेंस में औसत मासिक खर्च जितना पॉजिटिव बैलेंस हो जाये।
उदाहरणः मान लीजिये, आपका मासिक बिजली खर्च रू0 3,000 है। आपका पोस्डपेड बकाया रु० 10,000 तथा वर्तमान प्रीपेड बैलेंस रू० (-) 1,000 है। अगर आप रू0 4,500 से रिचार्ज करते हैं तो किये गये। रिचार्ज से 10% आपके पोस्टपेड बकाये में समायोजित हो जायेगा।
किया गया रिचार्ज
पूर्व पोस्टपेड बकाया
पोस्टपेड बकाये में समायोजित (10%)
रू0 450
अवशेष पोस्टपेड बकाया
: प्रीपेड हेतु उपलब्ध रिचार्ज
पूर्व बैलेंस
रिचार्ज के बाद नया बैलेंस
: रू0 4500
रु० 10,000
रू0 9,550
(4500-450)= रू0 4050
रु० (-) 1,000
(4050-1000) = रु0 3050
प्रश्न 25 रिचार्ज करने की न्यूनतम और अधिकतम सीमा क्या है?
उत्तर- रिचार्ज की कोई न्यूनतम अथवा अधिकतम सीमा नहीं है। आप अपनी आवश्यकतानुसार कितनी भी राशि का रिचार्ज कर सकते हैं।
प्रश्न 26- क्या स्मार्ट मीटर के लिए अलग से मीटर रीडर आएगा?
उत्तर- नहीं। स्मार्ट मीटर स्वचालित रूप से हर महीने के अंत में बिल बनाता है। आपकी खपत का डेटा सीधे सर्वर पर चला जाता है। आपको बिल SMS के माध्यम से प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त आप अपना बिल UPPCL की विभागीय बेबसाइट www.uppel.org एवं ‘UPPCL. Smart App’ से डाउनलोड कर सकते है।
प्रश्न 27- क्या स्मार्ट मीटर सुरक्षित हैं?
उत्तर- हाँ, स्मार्ट मीटर पूरी तरह सुरक्षित हैं। डेटा ट्रांसमिशन के लिए एन्क्रिप्शन तकनीक का उपयोग किया जाता है. जिससे आपकी खपत की जानकारी गोपनीय रहती है।
प्रश्न 28- साइबर फ्रॉड से कैसे बचें?
उत्तर- 1. बिजली काटने की धमकी वाले फर्जी SMS से सावधान रहें। स्मार्ट मीटर के भुगतान से सम्बन्धित SMS लिंक UPPCL के निम्न SMS हेडर से ही भेजे जाते हैं-
UPPCLT
UPPCLA
ii. भुगतान करने के लिये, ऊपर दिये गये SMS हेडर से भेजे गये लिंक पर क्लिक कर भुगतान करने से पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि खुली वेबसाइट https://consumer.uppel.org/wss/pay_bill_home ही है।
iii. केवल आधिकारिक वेबसाइट (www.uppel.org) या अधिकृत ऐप का ही उपयोग करें।
iv. किसी कर्मचारी को स्मार्ट मीटर लगाने के लिए पैसा न दें।
v. किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को रिचार्ज के लिए पैसे न दें। केवल आधिकारिक माध्यमों का ही उपयोग करें।
प्रश्न 29 मीटर में ‘स्टोर रीडिंग’ (Stored Reading) क्या होती है?
उत्तर- मीटर में स्टोर रीडिंग वह यूनिट्स होती हैं जो मीटर में तो चलती रहती है. लेकिन किसी कारण से उनका सही समय पर बिल नहीं बन पाता और वे जमा होती रहती हैं। जब मीटर रीडर सही रीडिंग नहीं लेता या अनुमान से कम यूनिट डालकर बिल बना देता है, तो असली खपत और बिल में फर्क आ जाता है। यही फर्क मीटर में ‘स्टोर हो जाता है और इसी को “स्टोर रीडिंग” (Stored Reading) कहा जाता है।
उदाहरणः मान लीजिए 01.01.2026 को मीटर में रीडिंग 1000 यूनिट थी और उसका सही बिल बन गया। इसके बाद 01.02.2026 को मीटर की रीडिंग 1400 यूनिट हो गई, लेकिन मीटर रीडर ने बिना देखे 1100 यूनिट मानकर सिर्फ 100 यूनिट का बिल बना दिया। यानी 300 यूनिट का बिल नहीं बना और वह मीटर में ही रह गई। फिर 01.03.2026 को मीटर की रीडिंग 1700 यूनिट हो गई, लेकिन इस बार भी मीटर रीडर ने 1200 यूनिट मानकर सिर्फ 100 यूनिट का बिल बनाया। अब तक कुल 500 यूनिट (पहले 300 बाद में 200) का बिल नहीं बना और ये सारी यूनिट मीटर में स्टोर हो गईं।
अब जब अगली बार सही रीडिंग ली जाएगी, तो ये सारी बची हुई (स्टोर) यूनिट एक साथ जुड़कर बिल में आ जाएंगी। इसी वजह से उपभोक्ता को अचानक ज्यादा बिल दिखाई देता है, जबकि असल में वह पिछले महीनों की बची हुई यूनिट्स होती है। स्टोर रीडिंग मतलब वो यूनिट्स जिनका पहले बिल नहीं बना और बाद में एक साथ बिल में जुड़ जाती है।
प्रश्न 30- पुराने मीटर की ‘स्टोर रीडिंग’ (Stored Reading) का क्या होता है?
उत्तर- स्मार्ट मीटर लगने के समय, यदि आपके पुराने मीटर में कुछ ऐसी यूनिट्स (रीडिंग) बची हैं जिनका पिछला बिल नहीं बन पाया था, तो वह पूरी ‘अन-बिल्ड स्टोर रीडिंग’ स्मार्ट मीटर के पहले बिल में जोड दी जाएगी। इसी कारण स्मार्ट मीटर लगने के बाद पहला बिल आपको अधिक लग सकता है। यह कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं, बल्कि आपके द्वारा पहले उपयोग की गई बिजली का ही बिल है।
प्रश्न 31- स्मार्ट मीटर में पोस्ट पेड बैलेंस क्या होता है?
उत्तर- स्मार्ट मीटर में पोस्ट-पेड बैलेंस का अर्थ उस राशि से होता है जो प्रीपेड होने से पहले उपभोक्ता द्वारा उपयोग की गई बिजली के बदले अभी तक जमा नहीं की गई है, यानी यह एक प्रकार का बकाया (Outstanding) होता है। जब मीटर पोस्ट-पेड मोड पर चलता है, तो उपभोक्ता पहले बिजली का उपयोग करता है और बाद में उसका भुगतान करता है। मीटर हर दिन या हर समय आपके द्वारा खर्च की गई यूनिट्स को रिकॉर्ड करता रहता है और उसी के आधार पर बिल बनता रहता है। यह पूरा खर्च बकाया के रूप में जुड़ता रहता है, जिसे पोस्ट-पेड बैलेंस कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी उपभोक्ता ने एक महीने में रू0 1000 की बिजली इस्तेमाल की और उपभोक्ता ने अभी तक यह राशि जमा नहीं की है, तो उसके स्मार्ट मीटर में रू0 1000 पोस्ट-पेड बैलेंस के रूप में दिखेगा। जैसे-जैसे वह आगे और बिजली उपयोग करेगा, यह बकाया राशि बढ़ती जाएगी, और जब वह बिल का भुगतान कर देगा, तो यह बैलेंस शून्य हो जाएगा। इस प्रकार जिस दिन से उपभोक्ता का मीटर प्री-पेड हुआ है, उस दिन से पोस्ट पेड बैलेंस उपभोक्ता की देनदारी को दर्शाता है।
प्रश्न 32- क्या स्मार्ट मीटर लगने के कारण बिल अधिक आता है?
उत्तर- स्मार्ट मीटर लगने के बाद कुछ उपभोक्ताओं को बिल अधिक लगने का मुख्य कारण यह है कि अब बिजली की खपत का पूरा और सटीक हिसाब सामने आने लगता है। पहले पारंपरिक मीटरों में कई बार मीटर रीडर की गलती. मीटर के डिस्प्ले में खराबी या सही रीडिंग न दिखने के कारण गलत या अनुमानित रीडिंग दर्ज हो जाती थी। इससे वास्तविक खपत और बिल में अंतर रह जाता था। इसी अंतर के कारण कुछ यूनिट्स का बिल समय पर नहीं बन पाता और वे मीटर में जमा रहती है, जिन्हें स्टोर रीडिंग कहा जाता है। ये वे यूनिट्स होती हैं जिनका उपयोग तो हो चुका होता है, लेकिन उनका बिल बाद में बनता है। जब पुराने मीटर की जगह स्मार्ट मीटर लगाया जाता है. तो ये सभी जमा यूनिट्स एक साथ बिल में जुड़ जाती है, जिससे बिल अचानक अधिक दिखाई देता है। साथ ही, स्मार्ट मीटर लगने के बाद 7 से 15 दिनों तक क्वालिटी चेक और डेटा अपडेट की प्रक्रिया चलती है। इस दौरान स्मार्ट मीटर पोस्ट-पेड की तरह कार्य करता है, यानी उपयोग की गई बिजली का खर्च बकाया के रूप में जुड़ता रहता है। यदि इस राशि का समय पर भुगतान नहीं किया जाता, तो यह पोस्ट-पेड बैलेंस में दिखती रहती है और बढ़ती जाती है।
प्रश्न 33- क्या सोलर पैनल लगवाने पर मुझे स्मार्ट मीटर बदलना होगा?
उत्तर- नहीं। आपके घर लगा हुआ स्मार्ट प्रीपेड मीटर भविष्य के लिए तैयार (Future Ready) है। यदि आप बात में रूफटाप सोलर लगवाते हैं तो आपको मीटर बलने की आवश्यकता नहीं होगी। यही मीटर सोलर की ‘नेट मीटरिंग’ के लिए सक्षम है।
प्रश्न 34- क्या सोलर पैनल लगवाने पर मेरा बिजली का बिल शून्य हो जायेगा?
उत्तर- जब आपका सोलर पैनल बिजली बनाता हैं और वह बिजली आपके घर में इस्तेमाल हो जाती है, तो ठीक है। लेकिन अगर उससे ज्यादा बिजली बन जाती है और वह बच जाती है, तो वह बिजली बिजली विभाग के ग्रिड में चली जाती है-इसे Export यूनिट कहते हैं।
वहीं, जब आपके घर में जरूरत ज्यादा होती है और सोलर से उत्तनी बिजली नहीं बन पाती (जैसे रात में या बादल होने पर), तब आप बिजली विभाग से बिजली लेते हैं-इसे Import यूनिट कहते हैं। अगर आपके सोलर सिस्टम से भेजी गई बिजली (Export यूनिट) आपके द्वारा ली गई बिजली (Import यूनिट) से ज्यादा हो जाती है, तो आपके बिजली बिल में केवल इनर्जी चार्ज (Energy Charge) जीरो होता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपका पूरा बिजली बिल जीरो हो गया है। आपको फिर भी फिक्सड चार्ज (Fixed Charge), इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी (Electricity Duty) और अन्य लागू शुल्क देने पड़ते है। यानि सोलर लगाने से आपका बिल कम हो सकता है, लेकिन पूरी तरह जीरो नहीं होगा क्योंकि कुछ जरूरी शुल्क हमेशा देने होते हैं।
यदि किसी महीने में आपकी Export यूनिट, Import यूनिट से अधिक होती है, तो बची हुई Export यूनिट अगले महीने के लिए आगे बढ़ा दी जाती हैं। ये यूनिट आपके बिजली बिल में “अंतिम अधिशेष सौर यूनिट (Closing Surplus Solar Units)” के नाम से दिखाई देती है। यह पूरी प्रक्रिया वित्तीय वर्ष (Financial Year) यानी अप्रैल से लेकर मार्च तक चलती रहती है। मार्च महीने के अंत में बची हुई Export यूनिट अप्रैल महीने में आगे (Carry Forward) नहीं होती है। इसके बजाय, इन बची हुई यूनिट के लिए आपको अप्रैल के बिल में प्रति यूनिट निर्धारित दर के अनुसार क्रेडिट (राशि समायोजन) दे दिया जाता है।
इसका मतलब यह है कि यदि आपके किसी महीने के बिजली बिल में ‘अंतिम अधिशेष सौर यूनिट (Closing Surplus Solar Units) में यूनिट्स दिखाई दे भी रहीं है, तो भी केवल बिल में इनर्जी चार्ज (Energy Charge) जीरो होगा, लेकिन इसके अलावा फिक्स्ड चार्ज (FC), इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी (ED) और अन्य शुल्क प्रतिदिन आपके बैलेंस से कटते रहेंगे। इस वजह से अगर आपका बैलेंस खत्म या निगेटिव होता है तो आपका कनेक्शन कट सकता है। इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि आप समय-समय पर अपना प्री-पेड बैलेंस रिचार्ज करते रहे और कम से कम इतनी राशि अवश्य रखें, जिससे बैलेंस खत्म या निगेटिव होने की स्थिति न आए। मार्च महीने तक एकत्र हुई सरप्लस सोलर यूनिट (Surplus Solar Units) का क्रेडिट (राशि समायोजन) उपरोक्तानुसार अप्रैल महीने में दिया जायेगा।
जारी शेष अगले भाग में













