दो दिन देशभर के जाने-माने विशेषज्ञ पाचन तंत्र व लिवर रोगों पर करेंगे चर्चा, पद्मश्री डॉ. रणधीर सूद सहित कई प्रतिष्ठित चिकित्सक होंगे शामिल
झांसी (एसजे न्यूज़ )। ओरछा में 31 अक्टूबर व 1 नवंबर को दो दिवसीय गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सम्मेलन व लाइव केस वर्कशॉप UPISGCON-2026 आयोजित किया जा रहा है। इसमें पद्मश्री डॉ. रणधीर सूद सहित देश भर के जाने-माने प्रतिष्ठित विशेषज्ञ चिकित्सक पाचन तंत्र और लिवर रोगों पर चर्चा करेंगे। बुंदेलखंड क्षेत्र में इस स्तर के चिकित्सा शैक्षणिक आयोजन से स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञता के विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा। सम्मेलन में विभिन्न चिकित्सा विषयों पर चर्चा के साथ विशेषज्ञों के अनुभवों को साझा किया जाएगा।
ऑर्गनाइजिंग चैयरमेन डॉ. शरद चन्द्रा ने सम्मेलन के उद्देश्यों, इसकी शैक्षणिक गतिविधियों और देशभर से शामिल होने वाले चिकित्सा विशेषज्ञों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मेघराज मेमोरियल गैस्ट्रो लिवर फाउंडेशन एजुकेशनल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भाग लेंगे। सम्मेलन में पाचन तंत्र एवं लिवर से संबंधित बीमारियों के आधुनिक निदान, उपचार की नवीनतम तकनीकों और चिकित्सा क्षेत्र में हो रही प्रगति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। साथ ही लाइव केस वर्कशॉप के माध्यम से चिकित्सकों को व्यावहारिक चिकित्सा ज्ञान और विशेषज्ञों के अनुभवों से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन में एम्स दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़, संजय गांधी आातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), एआईजी हैदराबाद और मेदांता जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। इनमें पद्मश्री से सम्मानित डॉ. रणधीर सूद (मेदांता), डॉ. आर. के. धीमान (एसजीपीजीआई) और डॉ. योगेश चावला (पीजीआई चंडीगढ़) प्रमुख रूप से शामिल हैं।
उन्होंने बताया गया कि इस आयोजन का उद्देश्य चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच ज्ञान व अनुभवों का आदान-प्रदान करना तथा पाचन व लिवर संबंधी रोगों के उपचार में अपनाई जा रही आधुनिक पद्धतियों से चिकित्सकों को अवगत कराना है। ऐसे शैक्षणिक आयोजनों से क्षेत्र के चिकित्सकों को राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के साथ संवाद करने और अपने चिकित्सकीय ज्ञान को और बेहतर बनाने का अवसर मिलता है।
रामकुमार साहू














