# Jhansi रेलवे की 2.7 हेक्टेयर भूमि पर मियावाकी पद्धति से होगा सघन पौधरोपण

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झांसी रेल मंडल व वन विभाग, उप्र के मध्य पर्यावरण संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण अनुबंध

झांसी। झांसी रेल मंडल द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक अनुबंध किया गया। यह अनुबंध मंडल रेल प्रबंधक, झांसी अनिरुद्ध कुमार तथा मुख्य वन संरक्षक, बुंदेलखंड एच. वी. गिरीश की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर झांसी रेल मंडल की ओर से गौरव वरिष्ठ मंडल अभियंता (ओ एंड एफ) तथा वन विभाग की ओर से विभागीय वन अधिकारी नीरज आर्य द्वारा अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। अपर मंडल रेल प्रबंधक परिचालन नंदीश शुक्ल ने अपने स्वागत उद्बोधन में बताया कि इस अनुबंध के अंतर्गत रेलवे की 3.39 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। इसमें से 2.7 हेक्टेयर भूमि पर मियावाकी पद्धति से सघन वृक्षारोपण किया जाएगा। यह पद्धति सीमित क्षेत्र में कम समय में घने, स्वावलंबी और जैव-विविधता से युक्त वन विकसित करने में अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।

गौरतलब है कि मियावाकी पद्धति के अंतर्गत स्थानीय एवं देशज प्रजातियों के पौधों को अधिक घनत्व में रोपित किया जाता है, जिससे यह वन सामान्य वृक्षारोपण की तुलना में लगभग 10 गुना तेजी से विकसित होते हैं। यह पद्धति कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण में सहायक है, वायु गुणवत्ता में सुधार लाती है, भू-क्षरण को रोकती है तथा पक्षियों, कीटों एवं अन्य जीव-जंतुओं के लिए प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराती है। प्रारंभिक देखरेख के बाद ये वन स्वतः विकसित होते हैं, जिससे दीर्घकालिक रूप से यह एक टिकाऊ एवं प्रभावी समाधान सिद्ध होता है।

यह अनुबंध संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप है, विशेषकर लक्ष्य-13 (जलवायु परिवर्तन से निपटना), लक्ष्य-15 (स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण) तथा लक्ष्य-11 (सतत एवं हरित शहर एवं समुदाय) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार ने कहा कि भारतीय रेल पर्यावरण संरक्षण को अपनी कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग मानते हुए निरंतर हरित पहलों को बढ़ावा दे रही है। रेलवे भूमि पर मियावाकी पद्धति से किया जाने वाला यह वृक्षारोपण पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ करेगा और भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने में सहायक होगा। मुख्य वन संरक्षक एच. वी. गिरीश ने अपने वक्तव्य में कहा कि रेलवे एवं वन विभाग के बीच यह समन्वय पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय पहल है। मियावाकी पद्धति शहरी एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है, जिससे जैव-विविधता संरक्षण के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी सहायता मिलेगी। वन विभाग द्वारा 4 वर्ष तक संरक्षण भी किया जाएगा। उन्होंने इस सहयोग के लिए झांसी रेल मंडल की सराहना करते हुए इसे अन्य विभागों के लिए भी प्रेरणादायी बताया।

झांसी रेल मंडल एवं वन विभाग के इस संयुक्त प्रयास से क्षेत्र में हरियाली बढ़ेगी, पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार होगा तथा रेलवे की भूमि का उपयोग सतत एवं जनहितकारी उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किया जा सकेगा। इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक इंफ्रा प्रेम प्रकाश शर्मा, वन संरक्षक महावीर कौजलगी समेत सभी अधिकारीगण मौजूद रहे।

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