राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की झाँसी महानगर प्रचार विभाग की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न
झांसी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड क्षेत्र के संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपा शंकर जी ने झांसी में प्रचार विभाग की बैठक को संबोधित करते हुए ‘परिवार व्यवस्था भारत का आधार’ विषय पर गहन प्रकाश डाला।
उन्होंने संघ द्वारा शताब्दी वर्ष में चलाए जा रहे पंच परिवर्तन अभियान के अंतर्गत कुटुम्ब प्रबोधन (परिवार प्रबोधन) को विशेष महत्व देते हुए कहा कि यह केवल भाषण का विषय नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारने का संकल्प है। बैठक दीनदयाल नगर की अग्रसेन बस्ती स्थित महाराजा अग्रसेन सरस्वती विद्यालय मंदिर में संपन्न हुई। कृपा शंकर जी ने विस्तार से बताया कि वर्तमान समय में परिवार को समाज की एकता का मजबूत आधार बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिवार को संस्कारों से युक्त रखना, पश्चिमी प्रभाव तथा टूटते पारिवारिक बंधनों जैसी आधुनिक चुनौतियों के विरुद्ध सुदृढ़ करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि “परिवार मजबूत होने से ही समाज में समरसता, संस्कार और राष्ट्रभक्ति फलती-फूलती है – यही संघ का मूल मंत्र है।
“उन्होंने पंच परिवर्तन के संदर्भ में कुटुम्ब प्रबोधन पर विशेष बल देते हुए कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था राष्ट्र की नींव है। मजबूत परिवार से ही सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी अपनाना और आत्मनिर्भरता जैसे अन्य परिवर्तन संभव हो पाते हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों से अपील की कि वे अपने-अपने परिवारों में नियमित संवाद, सपरिवार भोजन, भजन-कीर्तन, बुजुर्गों का सम्मान तथा युवाओं में जिम्मेदारी की भावना जगाकर इस संकल्प को साकार करें।
उन्होंने कहा कि परिवार व्यवस्था भारत का प्राण तत्व और समाज की एकता का मुख्य आधार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ द्वारा बताए गए ‘पंच परिवर्तन’ केवल भाषण के विषय नहीं हैं, बल्कि इन्हें प्रत्येक स्वयंसेवक और नागरिक को अपने दैनिक व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है। यह विचार उन्होंने दीनदयाल नगर की अग्रसेन बस्ती स्थित महाराजा अग्रसेन सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित झाँसी महानगर प्रचार विभाग की बैठक को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
संस्कारित परिवार से ही संभव है राष्ट्र निर्माण बैठक को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कृपा शंकर जी ने कहा कि वर्तमान समय में पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव और टूटते परिवारों की चुनौतियों के बीच भारतीय परिवार व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि “जब परिवार मजबूत होगा, तभी समाज में समरसता, संस्कार और राष्ट्रभक्ति की भावना फलेगी-फूलेगी। परिवार को केवल इकाई न मानकर उसे संस्कारों का केंद्र बनाना ही संघ का मूल मंत्र है।”
पंच परिवर्तनों पर दिया जोर
उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे समाज के बीच जाकर ‘पंच परिवर्तनों’ (स्वदेशी, पर्यावरण, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य और सामाजिक समरसता) के महत्व को समझाएं। उन्होंने कहा कि आधुनिक चुनौतियों का सामना केवल एक जागरूक और संस्कारित परिवार ही कर सकता है।
बैठक के दौरान संगठन की मजबूती और प्रचार विभाग की आगामी कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई। इस गरिमामयी अवसर पर मुख्य रूप से मुनीश (सह प्रांत प्रचारक, कानपुर प्रांत), रामकेश (प्रांत कार्यवाह), सक्षम (महानगर प्रचारक, झाँसी), डॉ. जे. के. मिश्रा (महानगर प्रचार प्रमुख) के साथ महानगर प्रचार टोली के सदस्यों के साथ-साथ सभी नगरों के नगर प्रचार प्रमुख एवं सह-प्रमुख उपस्थित रहे। बैठक का समापन राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ किया गया।













