झांसी। वृंदावन से पधारे हरिवंश दास महाराज ने राम कथा करते हुए बताया कि गोस्वामी जी कहते हैं की रामचरित मानस की रचना मैंने नहीं स्वयं भगवान शिव ने की है।
उन्होंने बताया कि मानस की रचना कितने दिन में हुई लोगों के अंदर एक प्रश्न होता है जिसका समाधान है कि मानस की रचना मात्र 8 घंटे में हुई है। ब्रह्मा जी ने सरस्वती जी को बुलाया गणेश जी को लिखने के लिए कहा भगवान शिव आंख बंद करके गा रहे हैं और तुलसीदास जी इसको लिख रहे हैं। सिर्फ हिंदू नहीं रामचरित मानस का आश्चर्य आज मत पंथ को भूलकर सभी लोग ले रहे हैं, जीवन जीने का अनमोल तरीका सिखाता है।
उन्होंने बताया कि इसका नाम रामचरित मानस क्यों पड़ा। राम जी के चरित्र के विषय में तो इसमें लिखा गया है यदि किसी का धन या स्वास्थ्य गया कुछ भी नहीं गया परंतु यदि चरित्र गया तो सब कुछ गया जो रामचरित मानस का पाठ है उसका चरित्र ठीक रहता है। बाल्मीकि रामायण वेदाबतार है। राम चरित्र का आश्रय लेने से ब्राह्मण उत्तम ब्राह्मण क्षत्रिय उत्तम क्षत्रिय वैश्य उत्तम वैश्य और चतुर्थ वरण महत्व प्राप्त करने लगता है।
उन्होंने बताया कि वाल्मीकि ने तुलसीदास के रूप में अवतार लिया मानव को मानव बनने के लिए क्योंकि एक गांव का किसान मानस की चौपाइयां पढ़ने में सक्षम है रिश्तों की पवित्रता रामचरित मानस की कथा सिखाती है। प्रारंभ में ग्रंथ पूजन पुजारी रामेश्वर प्रसाद उपाध्याय, अनिल बघावन, ईश्वर अरमानी, नीता अवस्थी आदि ने किया।













