जो संविधान की कॉपी लेकर दिखाते घूम रहे उन्होंने ही लोकतंत्र की हत्या की थी : कुं मानवेंद्र सिंह

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लक्ष्मीबाई पार्क में लोकतंत्र सैनानी द्वार का लोकार्पण 

लोकतंत्र सैनानी व परिजनों को किया सम्मानित 

झांसी। लोकतंत्र सैनानी कल्याण परिषद झांसी के तत्वावधान में वीरांगना लक्ष्मीबाई पार्क में लोकतंत्र सेनानी द्वार लोकार्पण समारोह को सम्बोधित करते हुए उप्र विधान परिषद के सभापति व लोकतंत्र सैनानी कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा जो आज संविधान की कॉपी लेकर दिखाते घूम रहे हैं उन्हीं ने 1975 में संविधान की हत्या की थी।

उन्होंने आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघ की पहल पर लोकतंत्र सैनानियों द्वारा किये गये सत्याग्रह की जानकारी देते हुए बताया कि किस तरह उन्होंने संघ की मंशानुरूप लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान सरकार पर दबाव बनाने के लिए सत्याग्रह कर अकेले ही गिरफ्तारी दी थी। उन्होंने सत्याग्रहियों के कष्टों की चर्चा कर उनके संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि आपात काल में लोकतंत्र की रक्षा, संविधान मर्यादा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रहित में संघर्ष करते हुए जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों का यह देश सदैव ऋणी रहेगा। उन्होंने सभी को उनके संघर्ष को याद कर नमन करने का आह्वान करते हुए बताया कि भविष्य में आपातकाल जैसी स्थिति कभी नहीं आएगी।

प्रारम्भ में लोकतंत्र सैनानियों ने सत्याग्रह के दौरान हुई गिरफ्तारियों व संघर्ष की जानकारी साझा करते हुए लोकतंत्र की पुनर्स्थापना हेतु झांसी से सर्वाधिक 130 कार्यकर्ता जेल भेजे गए थे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए राष्ट्रीय सचिव पत्रकार गिरीश सक्सेना ने वीरांगना लक्ष्मीबाई पार्क में लोकतंत्र सेनानी द्वार के निर्माण में एम एल सी रामतीर्थ सिंघल के योगदान की सराहना करते हुए बताया कि उनके प्रयास से विधायक निधि से भव्य द्वार का निर्माण किया गया है।

इस दौरान आर एस एस के क्षेत्रीय कार्यवाह अनिल जी ने संघ के बारे में विस्तार से बताया। विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा के जिलाध्यक्ष सुधीर सिंह, अरिदमन सिंह, भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में एम एल सी रामतीर्थ सिंघल ने लोकतंत्र सैनानियों व उनके परिजनों का माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। इसमें बीरेंद्र साहू, ओमप्रकाश शर्मा, प्रो हरिमोहन गुप्ता, रामसेवक अरजरिया, राजेन्द्र कुशवाहा, जगदीश दुबे, रतन सिंह, छोटे लाल, शिवा जी गुप्ता, बसंत सावरीकर, गोरखनाथ दुबे, उमेश शहाणे, श्रीराम हुण्डेत, पवन गौतम, भानु नगरिया, बालकृष्ण, रामेश्वर, डॉ रघुवीर, पंकज बिरथरे, श्याम सुंदर कौशल, नरेश कुमार स्वामी, रमेश चंद्र पाठक, राजू बुकसेलर, राजेन्द्र पटसारिया, गया प्रसाद, काशीराम कुशवाहा, अंजू गुप्ता, घासी राम राजपूत, पुष्पा गुप्ता, बाबूलाल श्रीवास्तव, हनुमंत वर्मा आदि शामिल रहे। अंत में बीरेंद्र साहू ने आभार व्यक्त किया।

 

 

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