बीकेडी चौराहा पर अग्नि काण्ड के 20 पुराने मामले में आधा दर्जन छात्र नेता बरी

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प्रदर्शन में जैम लगाने व रोडवेज बस की तोड़‌फोड़, आगजनी के प्रयास का आरोप

झांसी। अपर सिविल जज (सीनियर डिविजन) कक्षा संख्या एक/अपर मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट अनिल कुमार सप्तम के न्यायालय में 20 वर्ष पूर्व बुन्देलखण्ड महाविद्यालय चौराहे पर आन्दोलन के दौरान रोड जैम करने व रोडवेज बस जलाने के प्रयास के आरोपी छात्र नेताओं को आज न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा अपराध साबित नहीं कर पाने पर बरी कर दिया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार नवाबाद थाना पुलिस को वादी अवध राज पटेल ने तहरीर देते हुए बताया कि 2 फरवरी 2005 को अपराह्न एक बजे बीकेडी चौराहे पर लड़कों की भीड़ एकत्रित थी। उसी समय झांसी डिपो की रोडवेज बस संख्या (यूपी 93 ई 2689) झांसी से आगरा जा रही थी। कुछ उपद्रवी छात्रों ने बस को रोक कर पत्थर मार कर शीशे तोड़ दिए और आग लगा दी। मौके पर पहुँच कर उप निरीक्षक संजय यादव व पुलिस कर्मियों ने आग को बुझाया। पुलिस के पहुंचने पर उपद्रवी तत्व भाग निकले। अन्य लोगों से जानकारी करने पर कुछ लड़कों के नाम पता चले, जिन्होंने रोड भी जैम कर दिया था। इस पर थाना नवाबाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना प्रारम्भ की। विवेचना व साक्ष्य के बाद नितिन वाजपेयी, प्रितिन कपूर, चन्द्र शेखर यादव, राजीव उर्फ राजू बबेले, आशीष उपाध्याय, जावेद अली के खिलाफ धारा 147, 148 427 भारतीय दण्ड संहिता व व 7 सीएलए ऐक्ट व धारा 3/5 डैमिज तहत आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया।

न्यायालय ने दोनों पक्षों की सुनवाई, साक्ष्य व गवाही के बाद न्यायालय ने माना कि अभियोजन प्रपत्रों को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया, परन्तु प्रत्रों के तथ्यों के सम्बन्ध में कोई ऐसा कथन नहीं किया गया, जिससे अभियोजन कथानक को कोई बल मिलता हो। साक्षी के साक्ष्य मात्र से अभियोजन प्रपत्रों की पुष्टि होती है। अभियोजन द्वारा अपने कथनों के समर्थन में अन्य  कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया आरोपित अपराध साबित हो सके। न्यायालय ने सभी आरोपियों को अपराध में दोषमुक्त कर दिया। अभियुक्तों को 7 दिन के भीतर धारा 437 (५) दण्ड प्रक्रिया संहिता के अनुपालन में प्रत्येक को 20 हजार रुपए का व्यक्तिगत बन्धपत्र व समान धनराशि का एक-एक प्रतिभूति दाखिल करने के आदेश दिए गए। बचाव पक्ष की पैरवी अधिवक्ता विवेक कुमार वाजपेयी व सन्दीप सिंह ने की।

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