“परिस्थितियों को कैसे संभालें भगवान श्रीराम के जीवन से सीखें”

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अंतर्राष्ट्रीय संत स्वामी अभेदानंद द्वारा चिन्मय ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ 

झांसी। चिन्मय मिशन झांसी द्वारा आई एम ए भवन में आयोजित चिन्मय ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ शनिवार को स्वामी अभेदानंद जी (चिन्मय मिशन, साउथ अफ्रीका) के सानिध्य में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर स्वामी अभेदानंद ने प्रवचन में कहा कि “जीवन में किसी की भी परिस्थितियाँ सदैव अनुकूल नहीं रहीं — चाहे वह अवतार ही क्यों न हों। हमारे प्रारब्ध कर्म अपना प्रभाव अवश्य दिखाते हैं और उनके साथ पीड़ा भी आती है। परंतु हम उन परिस्थितियों को कैसे संभालते हैं, यही हमें भगवान श्रीराम के जीवन से सीखना चाहिए।”

इस अवसर पर मुख्य रूप से एम.एल.सी. रामतीरथ सिंघल, ब्रह्मचारी राघवेन्द्र चैतन्य, डॉ. अशोक सक्सेना, प्रमोद गुलाटी, शीला गुप्ता, रजनी गुप्ता एवं चिन्मय मिशन झांसी के सचिव ईo मुकेश गुप्ता उपस्थित रहे।

चिन्मय मिशन द्वारा 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित यह ज्ञान यज्ञ, पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद द्वारा प्रवर्तित ज्ञान अमृत परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। इस प्रवचन श्रृंखला में 26 मार्च 2026 तक सायं 6:30 से 8:00 बजे, विषय: “राम आयेंगे” (रामचरितमानस – मनु शतरूपा प्रसंग) और 22 से 26 मार्च 2026, प्रातः 8:00 से 9:30 बजे, विषय: “गीता पंचामृत” (भगवद्गीता आधारित) होगा।

ज्ञान यज्ञ में स्वामी जी और चिन्मय साधक देश-विदेश से पधारे और अतिथियों में अपर्णा, घनश्याम, गीता, पद्मिनी, धीरेंद्र, एच.सी. गुप्ता जी, संतोष, निकिता जी, सुपर्णा, विवेक, ईशा, जयश्री, किरीट एवं इंदु की गरिमामयी उपस्थिति रही। झांसी साधकों में हरीश अग्रवाल, आर पी गुप्ता, मेघना गुप्ता, मोहन लाल सिरोठिया, राम श्री कृष्णा नूपुर चंद्रा अरोड़ा आदि रहे।

सचिव मुकेश गुप्ता ने कहा कि चिन्मय मिशन द्वारा यह ज्ञान यज्ञ झांसी एवं देशभर के श्रद्धालुओं के लिए एक दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर है। बाहर से आने वाले साधकों हेतु निवास एवं भोजन की विशेष व्यवस्था भी की गई है। सभी श्रद्धालुओं से आग्रह है कि वे सपरिवार उपस्थित होकर इस ज्ञान अमृत का लाभ प्राप्त करें।

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