झांसी में सौंदर्यीकरण के नाम पर पेड़ों की कटाई व कंक्रीटीकरण पर एनजीटी गंभीर

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12 दिन में अगली सुनवाई, डीएम को 2 दिन में रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश

झांसी। शहर में सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्यों के नाम पर पेड़ों की कटाई तथा सड़कों के कच्चे क्षेत्र और पेड़ों के तनों को कंक्रीट से ढकने के मामले में 20 मार्च 26 को एनजीटी में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने ट्रिब्यूनल को बताया कि तकनीकी कमी के कारण उनका जवाब रिकॉर्ड में प्रस्तुत नहीं हो सका है और आगे की तिथि प्रदान की जाए।

इस पर आवेदक नरेन्द्र कुशवाहा (पर्यावरण कार्यकर्ता) ने कड़ा विरोध दर्ज करते हुए कहा कि विपक्षी पक्ष जानबूझ कर समय पर रिपोर्ट दाखिल नहीं करते, जिससे बार-बार तारीख मिलती रहे और सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का बंदरबाट जारी रखा जा सके। आवेदक ने ट्रिब्यूनल को अवगत कराया कि 15 दिसम्बर 25 को डीएफओ द्वारा दाखिल रिपोर्ट पर उन्होंने 10 मार्च 26 को आपत्ति दाखिल की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएफओ कार्यालय के बाहर सड़क किनारे कंक्रीट से घिरे जिन पेड़ों के फोटोग्राफ एनजीटी में प्रस्तुत किए गए थे, उन पेड़ों को डीएफओ द्वारा कटवा दिया है।

आवेदक के अनुसार सौंदर्यीकरण के नाम पर झांसी में लगातार पेड़ों को नष्ट किया जा रहा तथा भू-जल रिचार्ज के लिए छोड़े जाने वाले कच्चे क्षेत्रों को सड़क से लगभग 2 फीट ऊंचा कर कंक्रीट किया जा रहा है। इससे वर्षा जल का जमीन में समावेश बाधित हो रहा है और पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे कार्य सरकारी धन के दुरुपयोग के उद्देश्य से किए जा रहे हैं, जिनके कारण शहर के लगभग 65 प्रतिशत पेड़ नष्ट हो चुके हैं।

 मामले में नारायण बाग का विशेष उल्लेख करते हुए आवेदक ने बताया कि नालों के निर्माण के नाम पर नारायण बाग में लगभग 15 एकड़ हरित क्षेत्र को उजाड़कर कंक्रीट कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, नगर निगम द्वारा अधिकरण में 971 पेड़ों के चारों ओर एक मीटर का घेरा बनाए जाने की रिपोर्ट को आवेदक ने भ्रामक बताते हुए कहा कि वास्तव में केवल 50–60 पेड़ों के आसपास ही कंक्रीट हटाया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने 12 दिन की शॉर्ट डेट प्रदान की है। साथ ही जिलाधिकारी के अधिवक्ता को 2 दिन के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने तथा आवेदक को उस पर आपत्ति प्रस्तुत करने के  लिए 10  दिन का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

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