सोमनाथ से बुन्देलखण्ड तक – आस्था, इतिहास व पुनर्जागरण का दिव्य संगम 

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चंद्रदेव द्वारा स्थापित मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के अंश‌ झांसी में, स्वर्गाश्रम बरुआसागर पर 30 मार्च को होगा रुद्राभिषेक

झांसी। आस्था, इतिहास और पुनर्जागरण की भावना को समर्पित सोमनाथ से बुन्देलखण्ड तक – आस्था, इतिहास व पुनर्जागरण का दिव्य संगम का भव्य धार्मिक आयोजन 30 मार्च को स्वर्ग आश्रम, बरुआसागर झांसी में आयोजित किया जाएगा। आर्ट ऑफ लिविंग परिवार, झांसी एवं स्वर्ग आश्रम समिति के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस कार्यक्रम में संत-महात्माओं का सान्निध्य और श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिलेगी।

स्वर्गाश्रम बरुआसागर समिति के उपाध्यक्ष राहुल रिछारिया ने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि हजारों वर्षों की आस्था, संघर्ष और पुनर्निर्माण की परंपरा का प्रतीक है। आयोजन में सोमनाथ महादेव की गौरवगाथा को बुंदेलखंड की धरती पर जीवंत किया जाएगा। कार्यक्रम में सोमनाथ मंदिर के इतिहास को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। आपने बताया कि 11वीं सदी में महमूद गजनवी के आक्रमण के बावजूद मंदिर की आस्था कभी नहीं टूटी। अनेक बार विध्वंस के बाद भी श्रद्धालुओं और शासकों ने इसे पुनः स्थापित किया, जो सनातन संस्कृति की अटूट शक्ति को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि गजनी के आक्रमण के बाद शिव लिंग के पावन अंशों को अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने सुरक्षित रखा और पीढ़ियों तक गुप्त रूप से उनकी पूजा अर्चना की। यह पावन अंश 2024-25 को गुरुदेव रविशंकर को समर्पित किए गए जो इस दिव्य अंशों को जन जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।

आर्ट आफ लिविंग की जोनल‌ कोर्डिनेटर डा.कंचन आहूजा ने बताया कि स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का निर्णय लिया गया। 11 मई 1951 को राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की। इसे स्वतंत्र भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है। डा. संजय त्रिपाठी ने बताया कि आयोजन में सोमनाथ मंदिर के धार्मिक महत्व के साथ-साथ इसके वैज्ञानिक पहलुओं पर भी चर्चा की जाएगी। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, मंदिर का स्थान और संरचना विशेष खगोलीय महत्व रखते हैं, जो भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई को दर्शाते हैं। कार्यक्रम में शहर के कई गणमान्य लोग और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहेंगे। इस मौके पर आर्ट ऑफ लिविंग के महासचिव जेपीएन मिश्रा, डॉ महावीर वाजपेई, ओमी कुशवाहा, शिवप्रसाद अग्रवाल, रुचि अरोरा आदि भी मौजूद रहे।

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