नाबालिग से छेड़खानी का दोष सिद्ध होने पर मेडिकल कॉलेज कर्मी को 5 वर्ष की सजा 

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झांसी। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या 2/(बलात्कार संग पॉक्सो ऐक्ट अधिनियम सम्बन्धी) अनुभव द्विवेदी ने नाबालिग से छेड़खानी का दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त सुरेश राठौर निवासी आइटीआइ मस्जिद के पास थाना सीपरी बाजार को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 7 व 8 के तहत 5 वर्ष सश्रम कारावास व 10 हजार रुपए अर्थदण्ड की सजा सुनायी। अर्थदण्ड की आधी धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।

अभियोजन पक्ष की पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) चन्द्र प्रकाश शर्मा ने बताया कि वादी ने कोतवाली पुलिस को 19 जनवरी 2018 को तहरीर देते हुए बताया कि उसके रिश्तेदार को टीबी की बीमारी है और वह इलाज के लिए मेडिकल कॉलिज में भर्ती हैं। 19 जनवरी को दोपहर 12 बजे उसकी 10 वर्षीय भतीजी उसके लिए पानी लेने के लिए सीढी से आयी, तभी सीढ़ी में एकान्त पाकर अस्पताल के कर्मचारी सुरेश ने उसे रोककर बुरी-बुरी बातें कीं और अश्लीलता की। उसने पैसे का लालच दिया, लेकिन जब उसने पैसे नहीं लिए, तो धमकी देकर चला गया कि तुम्हारे पिता अस्पताल में मर जाएंगे। इसकी सूचना भतीजी ने मेडिकल कॉलिज में भर्ती अपने पिता, सिस्टर व अन्य स्टाफ को दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया।

न्यायालय में सुनवाई के दौरान नाबालिग से छेड़खानी का दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त सुरेश राठौर निवासी आइटीआइ मस्जिद के पास थाना सीपरी बाजार को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 7 व 8 के तहत 5 वर्ष सश्रम कारावास व 10 हजार रुपए अर्थदण्ड की सजा सुनायी। अर्थदण्ड की आधी धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।

 

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