अभियोजन पक्ष – बचाव पक्ष के विजेता प्रतिभागी पुरस्कृत
झांसी। बुंदेलखंड कॉलेज में डॉ0 भीमराव अम्बेडकर राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में योगेश चंद दुबे (कुलगुरू, पी.के. यूनिवर्सिटी) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश भटनागर उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने विधि शिक्षा में मूट कोर्ट की महत्ता पर प्रकाश डाला और छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो0 एस0के0 राय ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं छात्रों के व्यक्तित्व विकास और न्यायिक प्रक्रिया की समझ को सुदृढ़ करती हैं। वहीं विधि विभागाध्यक्ष एल0 सी0 साहू ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रतियोगिता के महत्व पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात प्रतियोगिता प्रारम्भ हुई।
प्रतियोगिता का विषय Devinder Singh vs State of Punjab था। इस मामले में विवाह के बाद महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हुई, जिसके लिए पति और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया गया। अदालत ने साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितियों का गहन परीक्षण करते हुए यह देखा कि क्या मृत्यु दहेज के कारण हुई है। यह मामला Dowry Prohibition Act, 1961 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 के तहत दहेज मृत्यु के प्रावधानों को समझने में महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस प्रतियोगिता में विभिन्न विधि महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया और अपनी कानूनी तार्किक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के संयोजक की भूमिका डॉ0 राजेंद्र प्रसाद और सह-संयोजक की भूमिका डॉ0 नीता राय ने निभाई। वहीं, पूरे कार्यक्रम का संचालन डॉ0 अजीत गुप्ता द्वारा किया गया।
प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल (Jury) के रूप में डॉ0 डी0 पी0 गुप्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश भटनागर ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत की गई दलीलों, कानूनी ज्ञान और अदालत कक्ष के शिष्टाचार का बारीकी से मूल्यांकन किया।
विजेताओं की सूचीः
निर्णायक मंडल के मूल्यांकन के आधार पर अभियोजन (Prosecution) और बचाव (Defence) दोनों पक्षों के विजेताओं की घोषणा की गईः
अभियोजन पक्ष:
प्रथम पुरस्कार: शिफा और दीपमाला (बुंदेलखंड कॉलेज, झाँसी)
द्वितीय पुरस्कार: नैतिक सिंह और खुशनदा मिर्जा (बाबू जगजीवन राम विधि संस्थान, झाँसी)
तृतीय पुरस्कार: तस्कीन फातिमा और भार्गवी गुप्ता (बुंदेलखंड विधि महाविद्यालय, उरई)
बचाव पक्ष:
प्रथम पुरस्कार: अलबिया जैदी और शिवम सेन (शासकीय विधि महाविद्यालय, दतिया)
द्वितीय पुरस्कार: उत्कर्ष श्रीवास्तव और अनुष्का तिवारी (बुंदेलखंड विधि महाविद्यालय, उरई)
तृतीय पुरस्कार: रूसी खान और रामप्रकाश (विवेकानंद विधि महाविद्यालय, झाँसी)
इस अवसर पर अतिथियों और विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापकों की विशेष उपस्थिति रही। इनमें मुख्य रूप से डॉ0 संजीव शेखर सिंह, डॉ0 आदित्य कुमार सिंह, डॉ0 अजय कुमार प्रजापति श्रीमती राधिका सिंह, डॉ0 विकाक्ष कटियार, डॉ0 कल्पना सिंह मौजूद रहे।
इसके साथ ही अन्य महाविद्यालयों से आए अतिथि प्राध्यापकों में बुंदेलखंड विधि महाविद्यालय उरई से डॉ0 महेंद्र राजपूत; स्वामी विवेकानंद विधि महाविद्यालय झाँसी से डॉ0 सिद्धार्थ; बाबू जगजीवन राम विधि संस्थान झाँसी से डॉ0 रवि श्रृंगऋषि व डॉ0 अपर्णा अग्रवाल और शासकीय विधि महाविद्यालय दतिया से डॉ0 किरण बाला ने उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के अंत में सभी विजेताओं को स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।













