दिल्ली की MP-MLA कोर्ट ने माना दोषी, भेजा तिहाड़ जेल
नई दिल्ली संवाद सूत्र। भाजपा के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा को चुनाव हराने वाले मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती की 25 साल पुराने एक मामले में मुश्किलें बढ़ गई हैं और कांग्रेस को झटका लगा है।
दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 25 साल पुराने धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बैंक को आर्थिक क्षति पहुंचाए जाने के मामले में दोषी करार दिया है। कोर्ट ने राजेन्द्र भारती को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी, जिसमें सजा सुनाई जाएगी। विधायक राजेन्द्र भारती ने अपनी मां के नाम बैंक में जमा 10 लाख की एफडी को 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दिया था।
25 साल पुराना है मामला
जिस मामले में कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को सजा सुनाई गई है, वह 25 साल पुराना है। 24 अगस्त 1998 को आरोपी राजेन्द्र भारती की मां सावित्री श्याम ने श्याम सुंदर श्याम संस्थान की अध्यक्ष रहते हुए 10 लाख रुपए की एफडी जिला सहकारी ग्रामीण विकास बैंक दतिया में की थी। यह एफडी 3 साल के लिए 13.50 प्रतिशत ब्याज दर पर की गई थी। वर्ष 1998 से 2001 के दौरान इस बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष राजेन्द्र भारती थे।
आरोप है कि राजेन्द्र भारती ने जिला सहकारी ग्रामीण विकास बैंक दतिया के संचालक मंडल के अध्यक्षीय पद का दुरूपयोग करते हुए एफडी की अवधि को 3 साल से बढ़ा कर 10 साल और फिर 15 साल किया व इतने सालों तक 13.50 प्रतिशत ब्याज दर का लाभ मिलता रहा। इसके लिए बैंक की लेजर बुक, एफडी की काउंटर स्लिप और एफडी की रसीद में काटछांट की गई।
प्रति वर्ष 1.35 लाख का पहुंचा फायदा
आरोप है कि आरोपी राजेन्द्र भारती ने आरोपी रघुवीर शरद प्रजापति के साथ दस्तावेजों में कूटरचना करके 1999 से 2011 तक हर साल 1 लाख 35 हजार रुपए का लाभ अपनी मां सावित्री व खुद की संस्था को पहुंचाया। इससे बैंक को आर्थिक हानी पहुंची। मामला तब सामने आया, जब राजेन्द्र भारती जिला सहकारी ग्रामीण विकास बैंक के संचालक मंडल से हट गए। इसके बाद हुई ऑडिट आपत्ति के बाद सहकारिता विभाग ने 29 सितंबर 2015 को कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत किया था।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
इस मामले में राजेन्द्र भारती ने अपने खिलाफ दर्ज किए गए मामले को पहले हाईकोर्ट और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट तक चुनौती दी, लेकिन उन्हें कहीं से भी राहत नहीं मिल सकी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में यह दलील देते हुए अपील की थी कि मध्य प्रदेश में उनके इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो सकती। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला दिल्ली की स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था।













