झांसी। झांसी महानगर समेत उत्तर प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में 50 से 60 प्रतिशत तक कमीशन के लिए बच्चों को जूते मोजे, बेल्ट, डायरी, टाई, कोट के अलावा प्राइवेट पब्लिश हाउसेस की महंगी किताबें खरीदने के लिए बाध्य किए जाने के विरोध में मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से दिया गया। ज्ञापन में कहा गया कि शिक्षा निदेशालय की गाइडलाइन के अनुसार शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलवाया जाए जिससे आम जन मानस भी अपने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने में सक्षम हो।
ज्ञापन में बताया गया कि झांसी महानगर सहित पूरे जिले में मध्यम वर्गीय परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार है जिनके पास केवल मजदूरी ही जीवन यापन के लिए एक मात्र विकल्प है जो महीने भर मजदूरी करके भी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने में असमर्थ है क्योंकि प्राइवेट स्कूलों द्वार एक ही बुक डिपो से खरीदी हुई किताबों को पढ़ने के लिए बच्चों को बाध्य किया जाता है बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए भरी भरकम बोझ से मुक्त करवाने की कृपा करें।
1- झांसी महानगर सहित जिले में स्थित सभी प्राइवेट स्कूलों में कम से कम 5 साल तक किताबें न बदली जाए जिससे गरीबों को भी लाभ मिल सके और हर साल नई किताबें खरीदने का बोझ न पड़े।
2- दतिया,फर्रुखाबाद,कासगंज सहित अन्य जिलों जैसे झांसी में भी एनसीआरटी की किताबों से ही बच्चों को पढ़ाया जाए जबकि केंद्रीय विधायक में अभी भी एनसीआरटी की किताबें ही चलती है।
3-प्राइवेट स्कूलों द्वारा हर साल बच्चों की फीस बढ़ोतरी और एडमिशन के नाम पर एक मुश्त पेमेंट जमा करवाने पर भी रोक लगाई जाए।
ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से अभिषेक तिवारी, एडवोकेट प्रदीप झा, वरुण अग्रवाल, गोलू ठाकुर, अनुराग मिश्रा, एडवोकेट राजेश चौरसिया सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।














