बांदा से आए पीड़ित पत्रकारों के सीओ जीआरपी झांसी अनुभाग ने दर्ज किए बयान
झांसी। बांदा में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) पोस्ट दो मजदूर के पकड़े जाने के मामले की जानकारी करने गए महिला पत्रकार सहित तीन पत्रकारों के साथ अभद्रता, धक्का-मुक्की और अमर्यादित व्यवहार के मामले में शिकायत के बावजूद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने और जांच में पक्षपात पूर्ण कारवाई कर आरपीएफ को कथित क्लीन चिट दिए जाने से मामला और गरमा गया है।
इस मामले में बुधवार को जांच अधिकारी क्षेत्राधिकारी जीआरपी झांसी अनुभाग सलीम खान को बयान दर्ज कराने आए बांदा के पत्रकार रूपा गोयल ब्यूरो तेजस टुडे, ललित कुमार उम्मीद आफ पब्लिक और नीरज निगम संस्कार उजाला ने घटनाक्रम की सिलसिलेवार जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 22 मार्च की रात आरपीएफ पोस्ट बांदा पर पकड़े गए दो मजदूरों की जानकारी करने पत्रकार नीरज निगम गये थे। पोस्ट पर मौजूद आरपीएफ स्टाफ द्वारा उनसे अभद्रता कर धमकी देते हुए पोस्ट पर बैठा लिया।
इसकी जानकारी लगने पर रात में ही जब पत्रकार रूपा गोयल, ललित कुमार पोस्ट पर पहुंचे और पत्रकार साथी को जबरन पोस्ट पर बैठाने पर पूछताछ की तो संबंधित आरपीएफ स्टाफ ने अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर धमकाया। पीड़ित पत्रकारों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने न केवल अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, बल्कि धक्का-मुक्की करते हुए महिला पत्रकार का हाथ पकड़कर उसका मोबाइल फोन जबरन छीन लिया और उसे टेबल पर पटक दिया।
आरोप है कि इस दौरान महिला पत्रकार की गरिमा को ठेस पहुंचाने के साथ उसके चरित्र पर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जो न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता बल्कि कानून और मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है। घटना के अगले दिन 23 मार्च को पीड़ित महिला पत्रकार और उनके साथियों ने बाँदा आरपीएफ इंस्पेक्टर सुरुचि द्विवेदी को लिखित शिकायत दी, लेकिन आरोप है कि इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और समझौता का दबाव बनाया गया।
मामले को तूल पकड़ता देख खानापूर्ति के लिए बाद में जांच महोबा के आरपीएफ इंस्पेक्टर को सौंपी गई, जहां जांच के बाद संबंधित आरोपी आरपीएफ कर्मियों को क्लीन चिट दे दी गई, जिससे पत्रकारों में नाराजगी और बढ़ गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित पत्रकारों ने उच्च अधिकारियों को भी शिकायत भेजी। इस पर झांसी जीआरपी सीओ को जांच सौंपी गई।
जांच अधिकारी सीओ के बुलावे पर 15 अप्रैल को शिकायतकर्ता/पीड़ित पत्रकार रूपा गोयल ब्यूरो तेजस टुडे, ललित कुमार उम्मीद आफ पब्लिक और नीरज निगम संस्कार उजाला झांसी आए। यहां उन्होंने सीओ को सिलसिलेवार घटनाक्रम की जानकारी दी और वीडियो फुटेज दिखाते हुए निष्पक्ष जांच की अपेक्षा की। सीओ ने ऊंच-नीच समझाते हुए आरपीएफ पक्ष के आरोपों की जानकारी दी। इस पर पत्रकारों ने बताया कि आरपीएफ स्टाफ उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकियां दे चुका है। अपनी बात कहने के बाद तीनों पत्रकारों ने बयान दर्ज कराये।
फिलहाल सीओ ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। अब देखना है कि दूसरों पर अन्याय के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने वाले पत्रकारों को न्याय मिलेगा या नहीं। हालांकि पत्रकारों ने इस मामले न्याय के लिए न्यायालय में ले जाने का निर्णय लिया है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई हो पाती है या नहीं।
इस दौरान झांसी के वरिष्ठ पत्रकार रामकुमार साहू (साहू जागरण), अरविंद भार्गव (दैनिक नवसत्ता एक्सप्रेस), अंसार (दैनिक सिद्धी सरकार), नवीन यादव (दैनिक अमर स्तंभ) भी शामिल रहे।












