बुन्देलखण्ड की प्राचीन धरोहर का होगा विकास- रवि शर्मा विधायक

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बुंदेलखंड के इतिहास व पुरातत्व पर राष्ट्रीय सेमिनार 

झांसी। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर उ०प्र० राज्य पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई (बुन्देलखण्ड क्षेत्र), राजकीय संग्रहालय, झॉसी एवं बुन्देलखण्ड हेरीटेज सोसायटी के संयुक्त तत्त्वावधान में राजकीय संग्रहालय सभागार में ‘बुन्देलखण्ड तथा समीपवर्ती क्षेत्र के इतिहास एवं पुरातत्त्व विषय में नव अनुसंधान’ पर राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन हुआ।

कार्यकम का शुभारम्भ सदर विधायक पं० रवि शर्मा एवं विशिष्ट अतिथि दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री हरगोविन्द कुशवाहा ने दीप प्रज्वलित कर किया। बुन्देलखण्ड की प्राचीन धरोहर पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का भी शुभारम्भ किया गया। बुन्देलखण्ड हेरीटेज सोसायटी के अध्यक्ष डॉ० सुरेश कुमार दुबे ने सेमीनार के आयोजन के बारे में जानकारी दी। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ० राजीव कुमार त्रिवेदी ने सभी आगन्तुकों का स्वागत किया।

सेमीनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सदर विधायक ने कहा कि झा़सी नगर तथा समूचे बुन्देलखण्ड की पुरानी धरोहर का समुचित विकास करना वर्तमान शासन की योजना में सम्मिलित है। इस नीति में पुराने किलों को हेरीटेज होटल के रूप में विकसित किया जा रहा है। विशिष्ट अतिथि दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री हरगोविन्द कुशवाहा ने बुन्देलखण्ड की पुरानी संस्कृति के विभिन्न विधाओं तथा ऋषि परम्परा पर विस्तार से प्रकाश डाला। आधार व्याख्यान में संघ लोक सेवा आयोग के एडवाइजर डॉ० विजय माथुर ने बुन्देलखण्ड की सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो० देवेश निगम ने राजकीय संग्रहालय, झांसी को स्टोरी टेलिंग स्थल के रूप में भी विकसित करने पर बल दिया। वरिष्ठ समाजसेवी मोहन नेपाली ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में युवाओं की सहभागिता अवश्य होनी चाहिए जिससे आने वाली पीढ़ी में अपनी विरासत के प्रति जागरूकता बनी रहे।

इस अवसर पर उ०प्र० पुरातत्व विभाग द्वारा विगत वर्ष देवगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार की प्रोसीडिंग पुस्तिका एवं डॉ० प्रमोद कुमार अग्रवाल द्वारा लिखित “शाहजहां की व्यथा” पुस्तक का विमोचन भी किया गया। संग्रहालय के उपनिदेशक डॉ मनोज कुमार गौतम ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

सेमीनार के प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ० विजय माथुर, दिल्ली ने ‘बुन्देलखण्ड चित्र परम्परा में महिरावण प्रसंग का चित्रात्मक निरूपण, डॉ रामस्वरूप डेंगुला, दत्तिया ने अनूप प्रकाश ग्रन्थ और हिम्मतबहादुर गुसांई, द्वितीय सत्र में डॉ० कृष्ण मोहन जोशी, उदयपुर ने प्राकृत एवं बुन्देली दो महान जन भाषाएं डॉ० नरेश कुमार पाठक, म०प्र० राज्य पुरातत्व विभाग ने त्रिवेणी संग्रहालय, उज्जैन में सुरक्षित विन्ध्य प्रदेश की प्रमुख प्रतिमाए, जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रो० आर०पी० पाण्डेय ने लुप्त सरस्वती नदी की गंगाघाटी में खोज, डॉ० धर्मजीत कौर, जयपुर ने ओरछा और जोधपुर में निर्मित राजाओं के स्मृति स्मारकों का तुलनात्मक अध्ययन, भोपाल से आये डॉ० मैनुअल जोसफ ने पवाया से प्राप्त चकपुरूष की रहस्यपूर्ण जुड़वा प्रतिमाएं, डॉ० वसीम खाँ, भोपाल ने झांसी रानी के गुमनाम सेनानायक एवं उनका योगदान, डॉ सन्ध्या बड़वेलकर ने मध्य प्रदेश से युग-युग में प्राप्त नवग्रह प्रतिमाओं का ऐतिहासिक अध्ययन, प्रयागराज से आये आशुतोष द्विवेदी ने उत्तर भारत में पूर्व मध्यकाल में भूमिदान और कृषि का विस्तार, भोपाल से आये शिवम दुबे ने त्रिपुरी के कल्चुरि मन्दिर स्थापत्य का पुनर्भध्ययन तथा शुभम रजक ने भोपाल के कटारा हिल्स एवं लहरपुर के वनस्पति उद्यान से प्रकाश में आये पुरा पाषाण कालीन स्थलों का आरम्भिक अध्ययन, अमरकण्टक से आये सत्यम दुबे ने जनपद झांसी में ऐतिहासिक काल से पूर्व मध्यकाल तक की प्रतिमाओं का अध्ययन, वैभव शर्मा ग्वालियर ने बुन्देलखण्ड की रियासतों द्वारा प्रचलित सिक्के, चित्रों के माध्यम से अपने अपने शोध पत्रों का वाचन किया। इस अवसर पर हाफिज सिद्दीकी नेशनल इण्टर कालेज, लक्ष्मी व्यायाम मन्दिर सहित विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम में अनिल कुशवाहा, मनमोहन मनु, सुदर्शन शिवहरे, अर्जुन सिंह चांद, देवराज चतुर्वेदी, रंजना सिंह बुन्देला, नीति शारत्री, उगा पराशर, अनिल उपाध्याय, साकेत सुगन चतुर्वेदी, नरेन्द्र कुमार, गोकुल दुबे, रमेश प्रसाद श्रीवास, सुशील चतुर्वेदी, महेन्द्र कुमार, संजय, सत्यम, अभिषेक, समीर, आजाद खान आदि उपस्थित रहे।

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