गुरुदेव चिन्मयानंद जयंती महोत्सव श्रद्धा, ज्ञान और गुरु समर्पण के भाव के साथ सम्पन्न

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झांसी। चिन्मय मिशन झांसी द्वारा पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी की जयंती के पावन अवसर पर “चिन्मय जयंती महोत्सव” का अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ आई एम ए भवन में आयोजन किया गया। ब्रह्मचारी राघवेंद्र चैतन्य के सानिध्य में कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं ईश आवाहन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन अध्यक्ष डॉ. प्रमोद गुलाटी, आर.पी. गुप्ता, एस पी अत्रि, एस पी गुप्ता, कांति गुप्ता एवं शीला गुप्ता द्वारा किया गया।

इस अवसर पर चिन्मय मिशन झांसी के सचिव इंजी0 मुकेश गुप्ता ने सभी साधकों, विशिष्ट अतिथियों एवं आगंतुकों का स्वागत किया। ब्रह्मचारी राघवेंद्र चैतन्य द्वारा गुरुदेव की पावन पादुकाओं का पूजन संपन्न कराया, जिसमें उपस्थित सभी साधकों एवं श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से सहभागिता की। साथ में अपने उद्धबोधन में गुरु तत्व पर अत्यंत प्रेरणादायी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु ज्ञान देकर स्वयं पीछे हट जाते हैं, किंतु उनका आशीर्वाद साधक के जीवन में सदैव मार्गदर्शक बना रहता है। उन्होंने कहा कि गुरु आत्मा और जीव के मध्य एक दिव्य संयोजक हैं, जो साधक को उसके अंतःकरण में स्थित परमात्मा से मिलाने हेतु ईश्वर के प्रतिनिधि रूप में जीवन में आते हैं। इसलिए उन्होंने कहा कि साधक के जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है और गुरु शरणागति हमारे जीवन मार्ग को सहज एवं सुगम बनाती है। समस्त दुखों से मुक्ति का वास्तविक मार्ग गुरु समर्पण में निहित है।

सचिव इंजी0 मुकेश गुप्ता ने गुरुदेव द्वारा स्थापित चिन्मय मिशन, संदीपनी गुरुकुल, चिन्मय इंटरनेशनल विद्यालय, विश्व हिंदू परिषद सहित अनेक आध्यात्मिक एवं सामाजिक उपक्रमों के माध्यम से हुए वैश्विक सामाजिक रूपांतरण पर प्रकाश डाला और इस वर्ष 75वे वर्ष के उपलक्ष्य में देश व्यापी चिन्मय यात्रा एवं दिल्ली समागम के बारे मे जानकारी दी। इस अवसर पर बाल विहार एवं युवा केंद्र के वेदपुत्र सौरभ, पलक, आयुष, शिवम, जिज्ञासा, एवं मनीष द्वारा ईश आवाहन गीत, भजन प्रस्तुत किए गए।

कार्यक्रम में हरीश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष मेघना गुप्ता, एस.एस. गुप्ता, एस.एन गुप्ता, श्रीमती नूपुर, पी.एन. गुप्ता, प्रेमलता गुप्ता, एस सी गुप्ता, प्रेमलता अत्रि, विनय गुप्ता सहित सौ से अधिक साधक उपस्थित रहे।
अंत में सचिव इं0 मुकेश गुप्ता ने सभी आगंतुकों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुदेव का संदेश — “ज्ञान, सेवा और आत्मजागरण” हम साधकों को निरंतर नई दिशा देता रहेगा।

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