सड़क से खुरच कर निकाले इंसान के शरीर के लोथड़े गठरी में बांध कर ले गए
बेटे ने कपड़े-चप्पल से पहचाना पिता का शरीर
झांसी। कहां है हाईवे पर चाक-चौबंद पुलिस ? तीन दिन तक कानपुर हाइवे पर मानव देह को वाहन रौंदते रहे और पुलिस को भनक तक नहीं लगी ! शव सड़क में इस तरह चिपक गया कि लोथड़ों को सड़क से खरौंच कर निकाला गया। उन्हें एक पोटली में बांध कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। जगमोहन का शव जिस जगह मिला, उससे लगभग 100 मीटर दूर पुलिस खड़ी होती है जबकि लगभग 250 मीटर दूर पुलिस चौकी है फिर भी पुलिस को लाश के बारे में पता नहीं चला।
रविवार रात को मृतक के बेटे आयुष ने चप्पलों और कपड़ों से शव की पहचान जगमोहन तिवारी (56) के रूप में की। मृतक जगमोहन तिवारी पूंछ थाना क्षेत्र के महाराजगंज ढेरी गांव के निवासी वह खेती किसानी करते थे। आयुष के अनुसार उसके बड़े भाई सागर मथुरा गए हुए थे, जबकि वह दादी शोमा तिवारी को लेने गुजरात गया था। घर पर पिता जगमोहन और मां रागनी थे। 9 अक्टूबर की सुबह लगभग 11 बजे पिता घर से झांसी-कानपुर हाइवे के किनारे खेत पर गए थे। रात को वो लौटकर नहीं आए तो मां ने सोचा कि खेत पर रुक गए होंगे। क्योंकि पहले भी वो खेत पर रात में रुक जाते थे। उनके पास मोबाइल नहीं था, इसलिए मां संपर्क भी नहीं कर पाईं।
आयुष रविवार को दादी को लेकर घर पहुंचा तो पिता नहीं थे। मां ने बताया कि खेत पर गए थे और फिर लौटकर नहीं आए। तब वह पिता को देखने खेत की तरफ गया। इस दौरान लोगों ने बताया कि एक एक्सीडेंट हुआ था। जब घटनास्थल पर पहुंचा तो पिता की चप्पल दिखाई दी। फिर तौलिए और कपड़े दिखे। वाहनों के रौंदे जाने से पिता का शव सड़क पर चिपक चुका था। कपड़ों और चप्पल से पिता के शव की पहचान की। उनके शरीर का कोई भी हिस्सा सुरक्षित नहीं बचा था। बाल के साथ मांस के लोथड़े भी मिले।
सूचना पर रविवार रात को पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को खरौंचकर निकलवा कर पोटली में बांध कर पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया। जगमोहन का शव जिस जगह मिला, उससे लगभग 100 मीटर दूर पुलिस खड़ी होती है। जबकि लगभग 250 मीटर दूर पुलिस चौकी है। फिर भी पुलिस को लाश के बारे में पता नहीं चला। हजारों वाहनों के रौंदे जाने से पूरा शव सड़क में चिपक गया।














