झांसी। राजनीति विज्ञान विभाग बुंदेलखंड कॉलेज झाँसी द्वारा आयोजित शैक्षणिक यात्रा के तहत राजनीति विज्ञान विभाग एम.ए. द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ने फतेहपुर सीकरी में ख्वाजा शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर चादर चढ़ाकर दुआएं की।
यह यात्रा झांसी से प्रातः 6:30 बजे प्रारंभ होकर रात्रि 2:00 बजे संपन्न हुई। इस शैक्षणिक भ्रमण में राजनीति विज्ञान विभाग एम.ए. द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ने सबसे पहले फतेहपुर सीकरी में ख्वाजा शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर चादर चढ़ाकर दुआएं की। बताया गया कि शेख सलीम चिश्ती वास्तव में चिश्तिया संप्रदाय के सूफी संत थे, उन्होंने अपने मत का प्रसार किया था वे ईरान से आए सिद्ध संत के रूप में हिंदू मुस्लिम एकता का प्रचार किया। वे भाई चारे को बढ़ावा देते थे, वे प्राणीमात्र में खुद को देखते थे वह चाहते थे कि मन, वचन और कर्म से किसी को दुःख न पहुंचाया जाए। इसी कारण से दरगाह पर आज भी हिंदू, मुस्लिम, इसाई सभी धर्म को मानने वाले इस विश्व विरासत को देखने के लिए आते हैं।
छात्रों ने कई विदेशी, बौद्ध धर्म के व क्रिश्चियन धर्म के लोगों से भेंट किया। इसके बाद सभी छात्रों ने आगरा की ओर प्रस्थान किया और वहां आगरा के किले का भ्रमण किया। आगरा के किले के निर्माण में चार शासकों का अहम योगदान रहा जिसमें अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब शामिल थे। यह कला का अद्भुत नमूना था जहां से आगरा का ताजमहल भी दिखता था। अंतिम समय शाहजहां ने यहीं समय बिताया था उसकी पुत्रियों रोशनआरा, जहांआरा का रहने का स्थान भी था। यहां पर हरम में रहने वाली स्त्रियों के स्थान भी दिखाए गए और उनकी रखवाली करने वाले ख्वाजासरा (किन्नरों) के रहने के स्थान भी थे। आगरा के किले का केवल 25%भाग ही दिखाया जा रहा था जो काफी बड़ा था जबकि 75% भाग सेना के अधीन था।
यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भारत श्रेष्ठ भारत के विजन पर आधारित थी। इस यात्रा में छात्रों ने यह भी सीखा कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था क्यों राजतंत्रात्मक व्यवस्था से बेहतर होती है। सर्व धर्म समभाव सर्व धर्म ममभाव भारत की एकता का मजबूत आधार है, इस बात का भी ज्ञान हुआ।
इस यात्रा में मुख्य रूप से डॉ. राजबहादुर मौर्य, डॉ. शिवकुमार यादव (एम.ए. व शैक्षणिक भ्रमण प्रभारी) व डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह, धर्मेंद्र, शिखा, स्तुति, जया, वंदना शाक्य, रक्षा राय, राधा, मधु, राहुल, प्रियंका वर्मा, कृष्णा, आशीष, मंगल, धीरेंद्र, ज्योति आदि उपस्थित रहे।













