राष्ट्रीय मांग दिवस पर झांसी में मंडलीय कार्यकर्ता सम्मेलन व प्रदर्शन पर भरी हुंकार
झांसी। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर गुरुवार को राष्ट्रीय मांग दिवस पर झांसी में बेतवा भवन में उप राज्य कर्मचारी महासंघ के तत्वावधान में आयोजित मंडल स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन व प्रदर्शन में राज्य कर्मचारियों का सरकार के प्रति जबरदस्त आक्रोश दिखाई दिया।
इस दौरान अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा, अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्स फैडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एसपी सिंह, उप्र राज्य कर्मचारी महासंघ के राज्य अध्यक्ष कमल अग्रवाल और महासचिव अशोक सिंह, प्रांतीय उपाध्यक्ष उप्र राज्य कर्मचारी महासंघ लखरमेश्वर सिंह जनपथ अध्यक्ष राजा सिंह चौहान व जिला मंत्री रामबाबू विश्वकर्मा आदि ने सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन में झांसी, जालौन व ललितपुर जनपदों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और मांगों को लेकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।
सम्मेलन के पूर्व सिंचाई विभाग निरीक्षण भवन में मीडिया से रूबरू भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी कर रही। पीएफआरडीए एक्ट रद्द कर जनवरी 2004 से पुरानी पेंशन योजना लागू करने की बजाय यूपीएस लागू कर जले पर नमक छिड़कने का काम किया है जबकि कर्मियों की यूपीएस की कभी मांग नहीं रही है और ना ही यह स्वीकार्य है। उन्होंने दावा किया कि अगर ओपीएस लागू नहीं हुई तो आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को कर्मचारियों और उनके परिजनों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार ठेका संविदा कर्मियों को पक्का करने की पॉलिसी बनाने को तैयार नहीं है। इतना ही नहीं सरकार विभागों और पीएसयू का निजीकरण करने पर आमादा है। पूर्वाचल एव दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मियों के एक साल से ज्यादा समय से चल रहे आंदोलन के बावजूद उप्र सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि 29 श्रम कानूनों को खत्म कर चार लेबर कोड्स बनाए गए हैं और पहली अप्रैल से लागू करने का ऐलान किया है। जिसके द्वारा यूनियन बनाने, हडताल करने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार पर जबरदस्त हमला किया गया है। उन्होंने लेबर कोड्स को मजदूरों की गुलामी का दस्तावेज करार दिया और कहा कि अगर इनको लागू किया तो मज़दूर और कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने पर मजबूर होंगे।
उन्होंने कहा कि देश में एक करीब एक करोड़ पद रिक्त हैं लेकिन सरकार इनको स्थाई भर्ती से भर बेरोजगारों को रोजगार देने की बजाय आंशिक रूप से संविदा पर कर्मियों को भर्ती कर रही है। जनवरी, 2026 से लागू होने वाली आठवें पे कमीशन की सिफारिशों का अभी कोई अता-पता नहीं है। उन्होंने दस की बजाय पांच साल में पे रिवीजन करने, कर्मचारियों, पेंशनर्स व संविदा कर्मियों को कैशलेश मेडिकल सुविधा देने, 65, 70 व 75 उम्र में बेसिक पेंशन में पांच प्रतिशत बढ़ोतरी करने और पेंशन कम्प्युटेशन राशि में 15 की बजाय 10 में रिकवरी करने आदि मांगों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि उक्त मांगों को लेकर अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ 1 मार्च को होने वाली बैठक में निर्णायक आंदोलन की रुपरेखा तैयार करेगा।
उप्र राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष कमल अग्रवाल व महामंत्री अशोक सिंह ने कहा कि सरकार बार-बार मांग पत्र भेजने के बावजूद बातचीत करने को तैयार नहीं है। काम की अधिकता होने के कारण अचल संपत्ति का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड न बनने वाले करीब 70 हजार कर्मियों के वेतन को रोक दिया गया है। उन्होंने इसकी निंदा करते हुए वेतन रिलीज करने की मांग की। अंत में सीपी भार्गव ने आभार व्यक्त किया।













