कोंच की रामलीला पर शोध पत्र वाचन हेतु किया गया सम्मानित
झांसी। तुलसी मानस प्रतिष्ठान एवं रामायण केन्द्र, भोपाल द्वारा श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास, संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश शासन के सहयोग से मानस भवन में “सामाजिक समरसता के आदर्श श्रीराम” विषय पर आयोजित चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झाँसी के समाज कार्य विभाग के सहायक आचार्य एवं बुन्देली लोकसंस्कृति के अध्येता डॉ. मुहम्मद नईम ने “लोक परम्परा एवं सांझी संस्कृति की प्रतीक–कोंच की रामलीला” विषयक शोध पत्र प्रस्तुत किया।
अपने शोध पत्र में डॉ. मुहम्मद नईम ने कहा कि बुंदेलखंड की कोंच की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक परम्परा, साँझी संस्कृति, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता का सशक्त उदाहरण है। इस रामलीला में विभिन्न समुदायों के लोगों की सहभागिता भारतीय सांझी संस्कृति की परंपरा को सुदृढ़ करती है।
उन्होंने बताया कि कोंच की रामलीला 175 वर्षों से क्षेत्रीय लोक परम्पराओं, जनसहभागिता और आपसी भाईचारे की मिसाल रही है। यह परंपरा समाज में सहयोग, सदभाव और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने का कार्य करती है। सम्मेलन में उपस्थित विद्वानों और शोधार्थियों ने डॉ. नईम के शोध पत्र की सराहना करते हुए इसे लोकसंस्कृति और सामाजिक समरसता के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण बताया।
इस अवसर पर रामायण केंद्र के निदेशक डॉ राजेश श्रीवास्तव, न्यासी सुरेश पटवा, प्रभुदयाल आदि द्वारा डॉ मुहम्मद नईम को श्री राम पट्टिका, स्मृति चिन्ह एवं सम्मान पत्र के माध्यम से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा, मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ विकास दवे, प्रो पुनीत बिसारिया, डॉ महेंद्र भीष्म, डॉ शरद शुक्ल आलोक, डॉ अनुभूति, डॉ सुनीता वर्मा, डॉ के एल बिन्दु, संजय सिंघाल, डॉ अशोक धमेनीय, डॉ मालती जोशी, डॉ सीमा शिवहरे आदि सैंकड़ों श्रोता उपस्थित रहे ।














