झांसी। चिन्मय मिशन झांसी द्वारा आयोजित चिन्मय ज्ञान यज्ञ के अंतर्गत रविवार को प्रातः “गीता पंचामृत” प्रवचन श्रृंखला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्वामी अभेदानंद के सानिध्य में हुआ। कार्यक्रम में डॉ. अनु निगम, संजय अग्रवाल (दैनिक भास्कर), आर.पी. गुप्ता, गोपाल गोयल, अपर्णा, स्वामी अभेदानंद, ब्रह्मचारी राघवेन्द्र चैतन्य एवं सचिव ईo मुकेश गुप्ता प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
स्वामी अभेदानंद ने अपने उद्बोधन में “गीता का अधिकारी कौन है?” विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि गीता का सच्चा अधिकारी वही है—
– जिसे संसार में दुःख का स्थायी समाधान नहीं दिखता,
– जो केवल अस्थायी सुख नहीं, बल्कि पूर्ण दुःख निवृत्ति चाहता है, जो ऐसा सुख चाहता है जिसमें दुःख का कोई बीज शेष न रहे तथा जिसे यह दृढ़ विश्वास हो जाए कि संसार में स्थायी सुख और सुरक्षा संभव नहीं है।
उन्होंने अर्जुन और दुर्योधन का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों ही परिस्थितियों से दुःखी थे, किन्तु अर्जुन ने भगवान की शरण ली और समाधान पाया, जबकि दुर्योधन ने बाहरी संघर्ष का मार्ग चुना। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन की अधिकांश समस्याओं का मूल कारण बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि हमारे भीतर की इच्छाएँ, वासनाएँ और अज्ञान हैं। जब तक यह अज्ञान बना रहता है, तब तक दुःख का अंत संभव नहीं होता।
चिन्मय ज्ञान यज्ञ के अंतर्गत प्रतिदिन सायं 6:30 से “राम आयेंगे” (रामचरितमानस – मनु शतरूपा प्रसंग आधारित) विषय पर प्रवचन एवं प्रातः 8:00 से (गीता पंचामृत) आई.एम.ए. भवन में आयोजित की जा रही है।
इस अवसर पर विनय गुप्ता, वीरेंद्र कुमार गुप्ता, स्वाति अरोड़ा, एच.एन. मोर, मेघना गुप्ता, डॉ. प्रमोद गुलाटी, पी.एन. गुप्ता, रजनी गुप्ता, कृष्णा सक्सेना सहित 200 से अधिक साधक उपस्थित रहे। सचिव ईo मुकेश गुप्ता ने झांसी में निर्माणाधीन चिन्मय ध्यान योग आश्रम हेतु सभी श्रद्धालुओं से आर्थिक सहयोग की अपील की एवं आभार व्यक्त किया।














