झांसी की रानी का जीवित रहते बनाया गया पहला ऐतिहासिक चित्र आया सामने

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पहली बार देखें झांसी की रानी का असली रूप

भोपाल मप्र। मप्र के जिला दतिया के संग्रहालय में कोने में रखे मिले दो फीट लंबे और पौने दो फीट चौड़े एक चित्र ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े इतिहास को जीवंत कर दिया है। माना जा रहा है कि यह रानी की जीवित अवस्था का पहला चित्र है। इसमें उन्हें घोड़े पर सवार दिखाया गया है। ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों के संग्रहण और संरक्षण के दौरान यह चित्र सामने आया है। इसे वर्ष 1849-50 के आसपास का माना जा रहा है।

मध्य प्रदेश राज्य पुरातत्व संग्रहालय एवं अभिलेखागार के इतिहासकार डॉ. मो. वसीम खान कहते हैं कि रानी कुलदेवी की पूजा के लिए कभी-कभी कड़ी सुरक्षा में जाती थीं। इसमें इस दृश्य का चित्रांकन है। यह समय उनके पति गंगाधर राव के वर्ष 1853 में निधन के पहले का है।

डॉ. वसीम बताते हैं कि रानी बहुत विशेष लोगों से ही मिलती थीं। इसी कारण रानी के चित्र नहीं हैं। जबकि अन्य तत्कालीन रियासतों की तुलना में गंगाधर राव के समय चित्रकारों को अच्छा संरक्षण मिला हुआ था। उनके मुख्य चित्रकार सुखलाल थे। इस की प्रबल संभावना है कि यह चित्र भी सुखलाल ने ही बनाया होगा। इस रंगीन चित्र में सोने के कणों का उपयोग किया गया है। परिवार के लोगों के पास एक ही चित्र 18 जून, 1858 को अंग्रेजों से लड़ते हुए रानी के वीरगति को प्राप्त होने के बाद नजदीकी दतिया रियासत की तरफ से भेजे गए कर्मचारियों ने उनके महल से यह चित्र लाकर रखा था।
रियासतों का विलय होने के बाद यह चित्र पुरातत्व विभाग के संग्रहालय में रखा गया था। डॉ. वसीम बताते हैं कि अभी रानी का एक ही चित्र (ब्लैक एंड व्हाइट) पुस्तकों और इंटरनेट मीडिया में मिलता है जो रानी के वीरगति को प्राप्त होने के बाद उनके दत्तक पुत्र दामोदर राव ने बनवाया था।

पुरातत्व विभाग के आयुक्त मदन कुमार नागरगोजे बताते हैं कि ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों के संग्रहण और संरक्षण के दौरान दतिया संग्रहालय से टीम को यह दुर्लभ चित्र मिला है। इसे संरक्षित किया जाएगा।

रानी का अभी तक एक ही प्रमाणित चित्र विश्व में मौजूद है, जो उनके परिवार के पास सुरक्षित है। इसे उनके पुत्र द्वारा स्मरण में मौजूद रानी की छवि के आधार पर इंदौर के एक चित्रकार द्वारा बनवाया गया था। दतिया से प्राप्त यह पेंटिंग प्रचलित चित्र से बहुत समानता रखता है। इसका संरक्षण जरूरी है, क्योंकि यह बहुमूल्य धरोहर है। – योगेश राव नेवालकर झांसी वाले, झांसी की रानी के वंशज, नागपुर
(साभार जेएनएन भोपाल)

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