झांसी। भारत के नए कानून के प्रावधान के तहत अपर सत्र न्यायाधीश आदित्य चतुर्वेदी की अदालत ने चोरी करने का दोष सिद्ध होने पर गैरहाजिर अभियुक्त को बीएनएस की धारा 356 के प्रावधान का उपयोग कर सात वर्ष की सजा व दस हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। कानूनविदों का कहना है कि यह झांसी जनपद का पहला व ऐतिहासिक फैसला है, जिसमें मुलजिम की गैर मौजूदगी में न्यायालय ने बीएनएस की धारा 356 का प्रयोग कर फैसला सुनाया है।
अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रवि प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि आलोक कनकने ने 15 सितंबर 2024 को नवाबाद थाना में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि वह सुबह करीब साढ़े नौ बजे विश्विद्यालय के पास स्थित अपनी मेडिकल स्टोर पर पहुंचा तो देखा दुकान की शटर के ताले टूटे पड़े थे, अंदर सारा सामान बिखरा पड़ा था, मंदिर में रखी भगवान जी की चांदी की मूर्तियां और दो मोबाइल, साढ़े सात हजार की नकदी और दवाइयां गायब थी। जब उसने सीसीटीवी कैमरा देखा तो उसमें एक व्यक्ति दुकान के ताले और ग्रिल काटकर दुकान में घुसा और चोरी कर भाग गया।
घटना की सूचना के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी संतोष ढीमर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी का माल बरामद कर लिया था। चोर संतोष ढीमर की पहचान मुकदमा वादी आलोक कनकने ने करते हुए बताया था कि यह वही आरोपी है जिसे उसने सीसीटीवी कैमरे में अपनी दुकान से चोरी करते देखा है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।
आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आ गया था। मुकदमा अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय कक्ष संख्या एक आदित्य चतुर्वेदी की अदालत में चल रहा था। आरोपी न्यायालय से फैसला के दिन आज गायब हो गया। न्यायालय ने भी बी एन एस की धारा 356 के प्रावधान का प्रयोग कर झांसी में पहला ऐतिहासिक फैसला मुलजिम की गैर हाज़िरी में सुनाते हुए उसे सात वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपए अर्थदंड का आदेश सुनाया है।














