बिना अनुमति ब्लॉगिंग, वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी दण्डनीय अपराध, एडवाइजरी जारी
झांसी। रेल प्रशासन द्वारा झांसी रेल मंडल में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर रेल परिचालन से संबंधित भ्रामक, अपूर्ण व तथ्यात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण विषय-वस्तु (कंटेंट), रील्स व व्लॉग्स से रेल यात्रियों में अनावश्यक भय व भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने से रेल प्रशासन की साख को ठेस पहुंचाने को गंभीरता से लिया जा रहा है। इस तरह की विषयवस्तु से सख्ती से निपटने के लिए कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।
रेल प्रशासन ने बताया कि उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर रेल परिचालन से संबंधित भ्रामक, अपूर्ण तथा तथ्यात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण विषय-वस्तु (कंटेंट), रील्स एवं व्लॉग्स का बढ़ता प्रसार अत्यंत गंभीर विषय है। यह संज्ञान में आया है कि कतिपय उच्च-सब्सक्राइबर वाले यूट्यूब चैनलों एवं अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों पर प्रसारित की जा रही सामग्री में न केवल भारतीय रेल की छवि को नकारात्मक रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से असुरक्षित एवं गैर-कानूनी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
झांसी मंडल यह स्पष्ट करता है कि इस प्रकार की सामग्री का प्रदर्शन रेल संचालन की वास्तविक प्रणाली को विकृत करता है तथा सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर संकट उत्पन्न करता है। सक्षम रेल प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना रेलवे परिसर, स्टेशनों, ट्रैकों या ट्रेन के डिब्बों में ब्लॉगिंग, वीडियोग्राफी अथवा फोटोग्राफी करना रेल अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के अंतर्गत एक संज्ञेय एवं दंडनीय अपराध है। सोशल मीडिया पर अधिक दृश्यता (व्यूज एवं लाइक्स) प्राप्त करने के उद्देश्य से पटरियों पर अनधिकृत प्रवेश (ट्रेसपासिंग), प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश अथवा जानलेवा स्टंट/गतिविधियां पूरी तरह निषिद्ध हैं।
झांसी मंडल समस्त सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स एवं आम नागरिकों से अपील करता है कि वे रेल परिसंपत्तियों एवं परिसरों का उपयोग करते समय नागरिक दायित्वों का पूर्ण निष्ठा से पालन करें। रेल परिसरों, डिपो, यार्डों एवं कार्यशालाओं (वर्कशॉप) में किसी भी प्रकार की शूटिंग हेतु नियमानुसार अग्रिम अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य है। परिचालन संबंधी ज्ञान के बिना अधूरी या भ्रामक जानकारी प्रसारित करने से रेल यात्रियों में अनावश्यक भय एवं भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे रेल प्रशासन की साख को ठेस पहुंचती है।
रेल अधिनियम, 1989 की सुसंगत धाराओं के अतिरिक्त, भारतीय रेल के विरुद्ध असत्य, भ्रामक अथवा मान हानिकारक सामग्री का निर्माण व प्रसार करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356(1) 356(2)तथा अन्य लागू विधिक प्रावधानों के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
झांसी मंडल अपने दैनिक संचालन में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने हेतु प्रतिबद्ध है तथा सम्मानित यात्रियों एवं हितधारकों के रचनात्मक सुझावों का सदैव स्वागत करता है। तथापि, तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने, असुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा देने या सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने के किसी भी प्रयास से सख्ती से निपटा जाएगा।
झांसी मंडल सभी यात्रियों, आम जनता एवं डिजिटल मीडिया प्रतिनिधियों से अनुरोध करता है कि वे सुरक्षित, वैध एवं जिम्मेदार रेल यात्रा संस्कृति को बढ़ावा दें तथा केवल आधिकारिक व सत्यापित स्रोतों से जारी सूचनाओं पर ही विश्वास करें।














