एमपी-एमएलए कोर्ट ने दी जमानत, FD की हेराफेरी में दोषी ठहराए गए
नई दिल्ली संवाद सूत्र। मप्र के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने एफडी हेराफेरी मामले में दोषी करार देने के बाद गुरुवार को एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें 3 वर्ष की सजा सुनाई और जमानत दे दी। विधायक को आपराधिक साजिश (धारा 120B) और धोखाधड़ी व जालसाजी (धारा 420, 467, 468, 471) में दोषी माना गया है। सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी ठहराया गया है।
कोर्ट ने दो धाराओं में 3-3 साल और एक धारा में 2 साल की सजा सुनाई है। इससे उनकी विधायकी पर खतरा बना हुआ है। वरिष्ठ वकीलों के अनुसार अगर हाईकोर्ट से सजा पर स्थगन (स्टे) मिल जाता है, तो उनकी विधायकी बरकरार रह सकती है। फिलहाल उनकी सदस्यता पर संकट बना हुआ है।
यह है मामला
घटनाक्रम की शुरुआत 1998 से शुरू होती है। श्याम सुंदर संस्थान की अध्यक्ष सावित्री श्याम (राजेंद्र भारती की मां) ने दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रु. की एफडी की थी। वर्ष 1998 से 2001 के बीच राजेंद्र भारती उसी बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष थे। वे श्याम सुंदर संस्थान के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के सदस्य भी थे।
भारती ने बैंक के लिपिक रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर बैंक के रिकॉर्ड में कूटरचना कर एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी। इसके बाद सालाना 13.5% की दर से ब्याज के 1,35,000 रुपए साल 1999 से 2011 के बीच निकाले गए।
बीजेपी नेता ने किया था उजागर
3 मार्च 2011 को बैंक अध्यक्ष बने भाजपा नेता पप्पू पुजारी मामले को सामने लाए। सहकारिता विभाग के तत्कालीन संयुक्त पंजीयक अभय खरे ने जांच की, जिसमें एफडी पर ऑडिट आपत्ति दर्ज हुई। 2012 में भारती ने बैंक से एफडी की राशि मांगी, लेकिन ऑडिट आपत्ति के चलते भुगतान से इनकार किया गया। भुगतान नहीं मिलने पर भारती उपभोक्ता फोरम पहुंचे, जहां से राहत नहीं मिली।
मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया, जहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बाद 2015 में तत्कालीन कलेक्टर प्रकाशचंद्र जांगड़े ने आपराधिक मामला दर्ज कराने की पहल की। कोर्ट के आदेश पर आईपीसी की अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज हुआ। एमपी-एमएलए कोर्ट गठन के बाद मामला ग्वालियर पहुंचा और अक्टूबर 2025 में इसे दिल्ली एमपी-एमएलए कोर्ट स्थानांतरित किया गया।
सीट खाली होने पर उपचुनाव होगा
विधायक के दोषी करार दिए जाने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। तीन साल की सजा के चलते उनकी विधायकी पर संकट है। सीट खाली होने पर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है। इसको लेकर हलचल तेज हो गई है।














